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चंडीगढ़ नगर निगम का बड़ा फैसला! हर कार्य का थर्ड पार्टी ऑडिट, बढ़ेगी पारदर्शिता, गुणवत्ता पर नहीं उठेंगे सवाल

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निगम अफसरों पर बहुत से टेंडर में अनुमान राशि अत्यधिक होने के आरोप लगते हैं।



बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम अब अपने प्रत्येक कार्य का होने के बाद थर्ड पार्टी आडिट कराएगा। यह आडिट काम की गुणवत्ता जांचने के लिए होगा। टेंडर में जो नियम, शर्तें व गुणवत्ता तय थी वह सही मायनों के जमीनी स्तर पर है या नहीं इसका पता लगाया जाएगा। इसके लिए निगम स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।

नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने थर्ड पार्टी आडिट के आदेश दिए हैं। सदन की पिछली बैठक में कमिश्नर के आदेश पर अधिकारियों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। पहली बार इस तरह से प्रत्येक कार्य का थर्ड पार्टी ऑडिट होगा।

बहुत से टेंडर में अनुमान राशि अत्यधिक होने, पसंदीदा कंपनी को फायदा पहुंचाने या आवंटन की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगते हैं। इसके बाद ग्राउंड स्तर पर काम की गुणवत्ता सही नहीं होने और देरी से होने जैसे मामले आम हैं। इसको खत्म करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नगर निगम ने इन सभी का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का निर्णय लिया है।

कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला के वार्ड में बनाई गई सड़क एक से दो माह में ही टूट गई थी। यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बना था। मामले में कॉन्ट्रेक्टर की लापरवाही सामने आई थी।

इसी तरह से रायपुर कलां गोशाला में पशु शव निस्तारण संयंत्र की मशीन लगने के छह महीने में ही खराब होने का मामला सामने आया था। इससे शवों के समय पर संस्कार नहीं हो पाए थे। सड़कों की गुणवत्ता से जुड़े तो बहुत से कार्य सामने आ चुके हैं।

डंपिंग ग्राउंड में कचरे की बायोमाइनिंग से जुड़े कार्यों में भी लगातार देरी होती रही है। अब ऐसे कार्यों की थर्ड पार्टी निगरानी होती रहेगी तो कांट्रेक्टर भी सावधानी से कार्य करेंगे।
आईआईसी के तीन एक्सपर्ट निगम कार्यालय बैठेंगे

निगम मिश्रित कचरे को कम करने और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को मजबूत करने के लिए इंटरनेशनल इनोवेशन कार्प्स (आईआईसी) का सहयोग लेगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुसार देश के सभी शहरों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण अनिवार्य है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मानदंड है।

चंडीगढ़ को इसमें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण निगम ने आईआईसी के साथ साझेदारी का प्रस्ताव तैयार किया है।आईआईसी यूनिवर्सिटी आफ शिकागो ट्रस्ट की एक सामाजिक पहल है, जो डिजिटल हेल्थ, शिक्षा और सामाजिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में कार्य करती है। आईआईसी की तीन सदस्यीय टीम 15 माह तक नगर निगम के साथ कार्य करेगी।

यह टीम निगम की संस्थागत क्षमता को मजबूत करने, संचालन व्यवस्था में सुधार लाने और कचरा प्रबंधन के टिकाऊ व विस्तार योग्य मॉडल विकसित करने में सहयोग देगी। इस पर निगम का कोई खर्च नहीं होगा। निगम को केवल फील्ड सहायता और कार्यस्थल उपलब्ध कराना होगा।
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