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23 फरवरी का पंचांग : फाल्गुन शुक्ल की षष्ठी ति ...


नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। यह जीवन के हर कार्य के लिए शुभ-अशुभ समय बताता है। 23 फरवरी के पंचांग पर नजर डालें तो दिन सोमवार है और फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है।
यह तिथि सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी शुरू हो जाएगी। सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव और चंद्रदेव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिवजी की पूजा, रुद्राभिषेक और सोमवार व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही चंद्रमा की कृपा से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। विशेषकर महिलाएं सोमवार का व्रत रखकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।




सोमवार का दिन शिव भक्ति, चंद्र पूजा और व्रत के लिए उत्तम है। शिवलिंग पर दूध, जल और बेलपत्र समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। सोमवार व्रत रख शाम को शिव मंदिर में दीपक जलाकर आरती करें।
23 फरवरी को सूर्योदय 6 बजकर 52 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 17 मिनट पर होगा। नक्षत्र भरणी शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा। योग ब्रह्म सुबह 10 बजकर 19 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 2 मिनट तक है, जो ध्यान, जप और साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 32 मिनट तक और रवि योग सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शाम 4 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इन समयों में नए कार्य, पूजा-पाठ या शुभ कार्य शुरू करना फलदायी होता है।
अशुभ समय का विचार करना भी जरूरी है। सोमवार को राहुकाल सुबह 8 बजकर 18 मिनट से 9 बजकर 44 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 11 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई नया काम या यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए।




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