प्रदेश में 50 से कम गोवंश वाले गोआश्रय स्थलों का होगा विलय, बड़े सेंटरों में शिफ्ट किए जाएंगे पशु
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/22/article/image/UP-Goshala-1771751085450_m.webpदीपक मिश्रा, बाराबंकी। गोवंश संरक्षण व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और संसाधन-सक्षम बनाने की दिशा में विभाग ने फैसला लिया है। स्कूलाें की तर्ज पर 50 से कम गोवंश संख्या वाले अस्थायी और स्थायी गोआश्रय स्थलों का विलय कर वहां संरक्षित पशुओं को बड़े एवं पर्याप्त क्षमता वाले गोआश्रयों में स्थानांतरित किए जाएंगे।
पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक डा. मेघपाल सिंह ने सभी मुख्य पशुचिकित्साधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। एक जनवरी 2026 के आधार पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संचालित 458 गोआश्रय स्थलों में गोवंश की संख्या 30 से भी कम पाई गई है।
11 फरवरी को अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें ऐसे गोआश्रयों को चिह्नित करने के आदेश दिए गए थे। संसाधनयुक्त और उच्च क्षमता वाले केंद्रों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया, ताकि गोवंश के भरण-पोषण की धनराशि सीधे संबंधित नए गोआश्रय स्थल को उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही स्थानांतरित किए गए गोवंश का विवरण गोआश्रय पोर्टल पर तत्काल अपडेट करना अनिवार्य होगा।
छह गोआश्रय शिफ्ट
अब जिले स्तर पर समिति की बैठक कर अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर छोटे गोआश्रयों का चरणबद्ध विलय किया जाएगा। जिले में लगभग 12 गोआश्रय केंद्र चिह्नित हैं, जिसमें छह का स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें मसौली का सरायकायस्थान, बंकी, सतरिख, सुबेहा, हैदरगढ़ और सिद्धौर नगर पंचायतें शामिल हैं, जहां के गोआश्रय के पशु दूसरी जगह शिफ्ट किए गए हैं। अभी और विलय होने हैं।
विभाग का मानना है कि इस कदम से छोटे, संसाधन विहीन केंद्रों पर अनावश्यक खर्च रुकेगा, बड़े गोआश्रयों की क्षमता का समुचित उपयोग होगा और गोवंश की देखभाल, भोजन, चिकित्सा एवं निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। -डॉ. सुधीर कुमार, डिप्टी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।
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