Mukul Roy Dies: पूर्व रेल मंत्री और दिग्गज TMC नेता मुकुल रॉय का निधन, 71 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
Mukul Roy Dies: पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता रहे मुकुल रॉय का सोमवार (23 फरवरी) को निधन हो गया। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक अस्पताल में रविवार (22 फरवरी) देर रात 1:30 बजे उनका निधन हो गया। वह 71 साल के थे। रॉय लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे। वह बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बेहद करीबी सहयोगी थे। उन्होंने 2009 में शिपिंग, 2011 से 2012 तक रेलवे और शहरी विकास के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर काम किया।उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि कोलकाता के साल्ट लेक के अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया। \“आज तक बांग्ला\“ से बात करते हुए सुभ्रांशु ने कहा, “सब कुछ खत्म हो गया है। दोपहर करीब 1:30 बजे जोरदार कार्डियक अरेस्ट के बाद उनकी मौत हो गई। उसके बाद उन्हें वापस लाना मुमकिन नहीं था।“
पिछले दो सालों में मुकुल रॉय हॉस्पिटल के अंदर-बाहर होते रहे। उनकी सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। वह जाने-पहचाने चेहरों को पहचान नहीं पा रहे थे। उन्हें राइल ट्यूब के जरिए लिक्विड खाना दिया जा रहा था। बताया जा रहा है कि सोमवार को उनका पार्थिव शरीर उनके घर वापस लाए जाने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में दूसरे नंबर के नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय ने 2019 के लोकसभा चुनाव से मुश्किल से दो साल पहले 2017 में पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर कई लोगों को चौंका दिया था।
2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में वे बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए। लेकिन बाद में उसी साल जून में वह फिर तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, घर वापसी के बाद TMC में उनकी सक्रियता पहले जैसी नहीं रही।रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। रॉय अभी कृष्णानगर नॉर्थ से विधायक थे।
उन्होंने 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की जीत में एक स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर अहम रोल निभाया था। उन्हें 2017 में नारदा स्टिंग स्कैंडल के बीच पार्टी से निकाल दिया गया था, जिसमें कथित तौर पर पैसे लेते हुए वीडियो रिकॉर्ड किए गए थे।
वह नवंबर 2017 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और बाद में 2020 में भगवा पार्टी के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट बने। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी के कैंपेन को मैनेज किया। लेकिन 2021 में सेहत की वजह से चुनावी राजनीति से रिटायर हो गए।
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उन्होंने 2021 का चुनाव BJP कैंडिडेट के तौर पर लड़ा और नतीजे आने के बाद तृणमूल कांग्रेस में वापस आ गए। ममता बनर्जी के साथ रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे, जो जनवरी 1998 में अस्तित्व में आई थी। वह कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी थे।
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