LHC0088 Publish time 2026-2-23 10:26:34

Holashtak 2026: होलाष्टक ही नहीं, इन 3 मौकों पर भी भूलकर न करें शुभ काम

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Holashtak 2026: इस दौरान भी नहीं होते शुभ काम।



धर्म डेक्स, नई दिल्ली। होली का त्योहार अपने साथ रंग, उमंग और ढेर सारी खुशियां लेकर आता है, लेकिन इस पर्व से ठीक आठ दिन पहले \“होलाष्टक\“ लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों को अशुभ माना गया है, क्योंकि इस दौरान नवग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। यही वजह है कि होलाष्टक में शादी-विवाह, मुंडन, सगाई, नया कारोबार व गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों की सख्त मनाही होती है।

लेकिन, सनातन परंपरा में केवल होलाष्टक (Holashtak 2026) ही नहीं, बल्कि कई अन्य अवधियां भी ऐसी हैं, जिनमें ग्रहों की स्थिति और धार्मिक मान्यताओं के चलते शुभ काम नहीं किए जाते हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं -

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खरमास

जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस एक महीने की अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। साल में दो बार खरमास लगता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की गति धीमी पड़ जाती है और गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए विवाह, मुंडन, और गृह प्रवेश जैसे शुभ काम रोक दिए जाते हैं।
चातुर्मास

आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। जगत के पालनहार के योग निद्रा में होने की वजह से इस दौरान विवाह, मुंडन और सगाई जैसे कोई भी मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं।
पितृ पक्ष

भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक के 15 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाता है। यह समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है। इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में नई वस्तुएं खरीदना, नए घर में प्रवेश करना व मांगलिक काम करना अशुभ माना जाता है।

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