गंगा डाॅल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ के साथ लीजिए एडवेंचर टूरिज्म का आनंद, चंबल नदी है बेहतर विकल्प
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/02AGC_5_02012026_521.JPG-1771836011250_m.webpचंबल में अठखेलियां करती डॉल्फिन।
सुमित द्विवेदी, आगरा। चंबल नदी में गंगा डाल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यह संरक्षण के प्रयासों की बड़ी कामयाबी है। हाल के सर्वे में पता चला है कि 2021 से 2025 तक इन जलीय जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है।
चंबल अभयारण्य की डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया वर्ष 2021 में चंबल नदी में घड़ियालों की संख्या 1860 थी, जो 2025 में बढ़कर 2026 हो गई। इसी तरह मगरमच्छ 586 से बढ़कर 869 हो गए और गंगा डाल्फिन की संख्या 129 से बढ़कर 221 पहुंच गई।
डीएफओ चांदनी सिंह ने कहा, यह आंकड़े हमारे लंबे समय से चल रहे संरक्षण कार्य की सफलता को दर्शाते हैं। चंबल का पानी साफ और पर्यावरण अनुकूल बना हुआ है, जिससे ये संवेदनशील प्रजातियां सुरक्षित रहकर प्रजनन कर पा रही हैं। लोग अब यहां घूमने भी आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वन विभाग, वन्यजीव संगठनों और स्थानीय लोगों की मदद से घड़ियालों के घोंसलों की सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने और रेत खनन पर रोक लगाई गई है। चंबल नदी भारत में घड़ियालों की सबसे बड़ी आबादी वाला इलाका है।
यहां घड़ियाल मुख्य रूप से मछली खाते हैं, जबकि मगरमच्छ छोटे जीवों पर भी शिकार करते हैं। दोनों प्रजातियां अलग-अलग तरीके से जीती हैं, इसलिए वे एक साथ रह पाती हैं। गंगा डाल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसकी बढ़ती संख्या खुशी की बात है।
इस तरह से वन विभाग के प्रयास जारी रहेंगे। स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि ये जीव नदी के संतुलन के लिए जरूरी हैं। वे प्रदूषण कम करने और नदी को साफ रखने में मदद कर रहे हैं। इस सफलता से अन्य नदियों में भी संरक्षण के मॉडल अपनाए जा सकते हैं।
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