क्या दिल्ली-NCR से बाहर हो जाएगी कोयला इंडस्ट्री? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/supreme-court-ncr-coal-industry-1771850508923_m.webpदिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नए थर्मल पावर प्लांट की स्थापना न करने की बनेगी नीति
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोयला आधारित उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट्स को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए हैं।
अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसा प्रस्ताव पेश करने को कहा है, जिसमें दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नए थर्मल पावर प्लांट की स्थापना न करने की स्पष्ट नीति शामिल हो।
ठोस सुझाव मांगे गए
एनसीआर की वायु गुणवत्ता से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय से इस मुद्दे पर ठोस सुझाव मांगे।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकारों को निर्देश दिया है कि वे सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी हितधारकों—विशेषकर एनसीआर में संचालित कोयला आधारित उद्योगों—से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करें।
जारी हुआ नोटिस
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नोटिस कोर्ट की ओर से जारी माना जाएगा और राज्य सरकारों को प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
पीठ ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से संयुक्त प्रस्ताव भी तलब किया है, जिसमें कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने की कार्ययोजना हो।
वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण के मामले में अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की सिफारिशों पर विचार के बाद 12 मार्च को आगे की सुनवाई करने की बात कही। साथ ही, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम द्वारा दिए गए सुझावों पर भी सभी संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी गई है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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