दिल्ली में साढ़े चार लाख बीएस-4 वाहन मालिक आदेश के इंतजार में, सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद भी PUCC पर अटका पेंच
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/Old-Vehicles-1771508751266-1771854360639-1771854376891_m.webpपीयूसीसी के इंतजार में सड़क पर वाहन नहीं उतार पा रहे हैं वाहन स्वामी।
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली में उम्र पूरी कर चुके साढ़े चार लाख वाहन मालिक सरकार के उस आदेश के इंतजार में हैं, जिस आदेश पर इन वाहनों को सड़क पर चलाने और न चलाने का फरमान आना है। उम्र पूरी कर चुके बीएस-चार श्रेणी के इन वाहनों को दो माह पहले सुप्रीम काेर्ट ने राहत दी है। दिल्ली सरकार भी घोषणा कर चुकी है कि इन वाहनों को सड़काें पर उतारे जाने से पहले इनके लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) लेना अनिवार्य है। मगर परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ऐसे वाहनों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
फिटनेस के आधार पर चलाने की मंजूरी!
गत जुलाई में जब परिवहन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व आदेश के आधार पर उम्र पूरी कर चुके वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की तो सामने आया कि इस कार्रवाई में मध्यम और निम्न वर्ग के लोग ही ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। इस पर लोगों को राहत दिलाने के तहत कार्रवाई रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सरकार ने दलील दी कि ऐसे वाहनों को उम्र के आधार पर नहीं फिटनेस के आधार पर चलाने की मंजूरी दी जाए।
वाहन मालिक सरकार के आदेश के इंतजार में
सुप्रीम कोर्ट ने गत दिसंबर में अपने फैसले में साफ किया कि ऐसे बीएस-तीन और इससे निचली श्रेणी के वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी। मगर उम्र पूरी कर चुके बीएस-चार श्रेणी के वाहनों पर कार्रवाई नहीं होगी। उम्र पूरी कर चुके वाहनों में बीएस-चार श्रेणी के वाहन मालिक सरकार के आदेश के इंतजार में हैं। गत अप्रैल से लेकर अब तक पिछले लगभग सात में दिल्ली में बीएस-चार श्रेणी के उम्र पूरी कर चुके वाहनों की संख्या साढ़े चार लाख के ऊपर पहुंच चुकी है।
परिवहन विभाग में चक्कर लगा रहे
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गत दिसंबर में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने लोगों को आगाह किया था कि बीएस-चार के वाहनों पर प्रतिबंध नहीं है मगर सड़क पर चलाने के लिए उनके पास वाहन का पीयूसीसी होना अनिवार्य है। अब लोग परिवहन विभाग के पीयूसी सेंटर परिवहन विभाग में चक्कर लगा रहे हैं कि उनका प्रमाण पत्र बनाया जाए, मगर पीयूसी सेंटर के सिस्टम में ऐसे वाहन उम्र पूरी कर चुके वाहनों की श्रेणी में आ रहे हैं। जिनका प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता है।
पीयूसीसी की अनुमति नहीं दी
ईस्ट दिल्ली आरडब्ल्यूए ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष वोहरा ने कहा कि जब दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग बीएस-चार गाड़ियों का पीयूसीसी और फिटनेस करने ही नही देंगे तो फिर सुप्रीम कोर्ट के इस आर्डर का क्या फायदा ? कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमति प्राप्त बीएस-चार वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दो महीने बाद भी दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने पीयूसीसी की अनुमति नहीं दी है, इसलिए वे बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के सड़क पर नहीं आ सकते।
बीएस-चार और बीएस-छह में एक जैसा एमिशन
परिवहन विशेषज्ञ और परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त अनिल छिकारा ने कहा कि सीएक्यूएम पहले ही कह चुका है कि बीएस-चार गाड़ियों की लाइफ 2030 तक और बीएस-छह गाडि़यों की उम्र 2040 तक बढ़ा दी जाए। वह कहते हैं कि विभिन्न अध्ययन में यह पता चला कि बीएस-चार गाड़ियों से हाेने वाला एमिशन बीएस-छह गाड़ियों जितना ही कंट्रोल में पाया गया है। अभी बीएस-चार गाड़ियां भी बीए-छह फ्यूल का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए बीएस-चार और बीएस-छह में एक जैसा एमिशन होता है।
बीएस-चार श्रेणी के वाहनों को राहत
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि बीएस-चार की गाड़ियों पर कार्रवाई नहीं होगी। उन्हें उठा लिए जाने के बारे में कोई बात नहीं कही गई है। अधिकारी ने कहा कि नोटिस में बीएस-तीन और उससे नीचे निचली श्रेणी के वाहनों पर कार्रवाई की बात कही गई है। नोटिस में 10 साल पुराने वाहनों का जिक्र किए जाने पर अधिकारी ने कहा है कि भविष्य में जारी होने वाले नोटिस में और स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि बीएस-चार श्रेणी के उम्र पूरी कर चुके वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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