पटना उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: डाक विभाग को NPS खाते में गड़बड़ी पर ब्याज सहित भुगतान का आदेश
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/Post-office-1771856144681_m.webpडाक विभाग को NPS खाते में गड़बड़ी पर ब्याज सहित भुगतान का आदेश
जागरण संवाददाता, पटना। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग की सेवा में कमी साबित होने पर 12 प्रतिशत ब्याज व जुर्माने के साथ पीड़ित को राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता के एनपीएस खाते में वर्ष 2013 में जमा 30,053 रुपये जमा दर्ज नहीं किए गए। बार-बार पीड़ित के अनुरोध व अधिकारियों के संशोधन के आवेदन के बावजूद विभाग ने सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की।
आयोग ने इसे उपभोक्ता के प्रति लापरवाही करार देते हुए डाक विभाग को दोषी करार दिया। पीड़ित को मानसिक पीड़ा व वाद व्यय खर्च के लिए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया है। आयोग की पीठ में अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा व सदस्य रजनीश कुमार ने यह आदेश दिया।
नौ वर्ष बाद आयोग में शिकायत, साढ़े तीन वर्ष बाद आया फैसला:
शिकायतकर्ता कंकड़बाग निवासी ओम प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि उनके एनपीएस अकाउंट नंबर 110053059734 में 5 सितंबर 2013 को 30,053 रुपये नकद जमा कराए गए थे। यह राशि उनके खाते में क्रेडिट नहीं की गई। बार-बार अनुरोध व पत्राचार के बावजूद न तो खाते में राशि जोड़ी गई और न ही वापस की गई।
उन्होंने सिवान डिविजन पोस्ट ऑफिस के सुपरिटेंडेंट, सिवान हेड पोस्ट ऑफिस के पोस्ट मास्टर, मुजफ्फरपुर स्थित उत्तरी क्षेत्र के डायरेक्टर ऑफ पोस्ट्स के खिलाफ 15 जून 2022 में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने सुनवाई शुरू की लेकिन डाक विभाग की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। करीब साढ़े तीन वर्ष बाद 29 जनवरी 2026 को आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी ठहराया।
आयोग ने आदेश में कहा कि 6 दिसंबर 2018 को सिवान डिवीजन के सुपरिटेंडेंट ने सीईपीटी मैसूर को रिमाइंडर पत्र भेजकर राशि को रिफंड या एडजस्ट करने का आग्रह किया लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया गया। यह सेवा में स्पष्ट कमी दर्शाता है।
इसके लिए अब डाक विभाग को 15 जून 2022 से मूल राशि 30,053 पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही शारीरिक-मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार, वाद व्यय के लिए दस हजार राशि का भुगतान अलग से करने का आदेश दिया।
पूरी राशि आदेश मिलने के 120 दिनों के अंदर नहीं करने पर दस हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा। इससे स्पष्ट है कि यदि किसी सरकारी या डाक सेवा में लापरवाही से उपभोक्ता को वित्तीय नुकसान होता है तो उपभोक्ता आयोग न्याय दिलाने व ब्याज सहित मुआवजा दिलाने में सक्षम है।
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