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फर्जी CBI, नकली जज और 24 दिन की ‘डिजिटल कैद’: ग्वालियर में 89 वर्षीय रिटायर्ड वायुसेना अफसर से 2.52 करोड़ की ठगी

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ग्वालियर में साइबर महाठगी (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा जाल बुना कि 89 वर्षीय सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी और उनकी पत्नी 24 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक कैद में रहे। खुद को CBI अधिकारी बताने वाले ठगों ने ऑनलाइन फर्जी कोर्ट लगाकर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ 52 लाख 16 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस का दिखाया डर

पीड़ित नारायण महादेव टिकेकर के अनुसार, 28 जनवरी को उनके व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया। स्क्रीन पर कोर्टरूम जैसा दृश्य था, जिसमें जज, वकील और पुलिस अधिकारी दिखाई दे रहे थे। कॉल करने वाले ने खुद को ‘विजय खन्ना’ नाम का मुंबई CBI अधिकारी बताया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने का डर दिखाया। आरोप लगाया गया कि उनके नाम से कैनरा बैंक में खुलवाए गए खाते में 20 लाख रुपये की संदिग्ध राशि आई है।
किश्तों में ट्रांसफर करवा ली रकम

इसके बाद शुरू हुआ ‘ऑनलाइन इंट्रोगेशन’ का सिलसिला। जांच और वेरिफिकेशन के नाम पर ठगों ने बुजुर्ग से उनकी संपत्ति, बैंक खातों और म्यूचुअल फंड की पूरी जानकारी ली। 28 जनवरी से 20 फरवरी के बीच पांच किश्तों में कुल 2.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

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जब टिकेकर बैंक पहुंचे और तथाकथित ‘एनओसी’ दिखाई, तब बैंक प्रबंधन ने दस्तावेज को फर्जी बताया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पहले भी हुई है महाठगी

गौरतलब है कि पिछले वर्ष मार्च में ग्वालियर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव को भी इसी तरह डिजिटल अरेस्ट कर दो करोड़ से अधिक की ठगी की गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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