चंद्र ग्रहण की छाया में होली 2026, परंपरा और आस्था के साथ बदला होगा होलिका दहन का समय
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/23/article/image/Holika-dahan-2026-1771866987908_m.webpHolika Dahan:होलिका दहन की पूजा विधि-विधान से करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है। फाइल फोटो
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Holika Dahan Muhurat:वर्ष 2026 की होली इस बार खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होने जा रही है। होली से एक दिन पहले होने वाले होलिका दहन के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
इसी कारण होलिका दहन और रंगों वाली होली की तिथियों और समय को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांगों के अनुसार इस बार शास्त्रसम्मत समय का पालन करना विशेष रूप से आवश्यक माना जा रहा है।
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ग्रहण के कारण बदला समय, पर परंपरा वही
धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. निगम पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 2026 में होलिका दहन 2 मार्च (सोमवार) को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी।
इसी दिन दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल और सूतक के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण इस वर्ष होलिका दहन ग्रहण समाप्ति के बाद ही करना शास्त्रसम्मत माना गया है।
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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
ग्रहण और भद्रा काल को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषाचार्यों ने शाम 06:48 बजे से रात 08:50 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धि के पश्चात ही पूजा-अर्चना शुरू करने की सलाह दी गई है। रंगों की होली यानी धुलेंडी अगले दिन 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
होलिका दहन की पौराणिक कथा आज भी समाज को नैतिक संदेश देती है। असुर राजा हिरण्यकश्यप के अत्याचार और अहंकार के सामने उसके पुत्र प्रह्लाद की अटूट भक्ति अंततः विजयी हुई। अग्नि से न जलने का वरदान होने के बावजूद वरदान के दुरुपयोग के कारण होलिका स्वयं भस्म हो गई, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित रहे। यह पर्व सिखाता है कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और भक्ति की विजय निश्चित होती है।
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विधि-विधान से पूजा, घर में सुख-शांति
डॉ. पाण्डेय के अनुसार होलिका दहन की पूजा विधि-विधान से करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का वास होता है। पूजा में गोबर के उपले, सूखी लकड़ी, कलावा, रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, मूंग की दाल, बताशे, गेहूं की बालियां और जल का प्रयोग किया जाता है।
पूजन के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखकर संकल्प लिया जाता है। होलिका के चारों ओर कलावा लपेटकर जल, फूल और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। नई फसल की बालियों को अग्नि में भूनकर प्रसाद रूप में ग्रहण करना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अंत में परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति और मंगलकामना की जाती है। https://www.jagranimages.com/images/womenday780x100.png?v1https://www.jagranimages.com/images/womendayANI380x100.gif
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