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8th Pay Commission: बेसिक में DA मर्ज करने की मांग क्यों कर रहे कर्मचारी, सता रहा लाखों के नुकसान का डर? पूरा गणित

नई दिल्ली| देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चा तेज है। सरकार संकेत दे चुकी है कि बढ़ी हुई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है, लेकिन रिपोर्ट आने और लागू होने में 18 महीने या उससे ज्यादा का वक्त लग सकता है।

यही देरी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए भारी पड़ सकती है। इसी वजह से डीए (महंगाई भत्ता) को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग जोर पकड़ रही है।

ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Dr Manjeet Singh Patel) के मुताबिक, अगर रिपोर्ट 18 महीने बाद लागू होती है, तो एरियर केवल बेसिक और डीए (8th Pay Commission Basic Salary DA Merger) के फर्क का मिलेगा।

लेकिन एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) और टीए (ट्रांसपोर्ट अलाउंस) का एरियर (8th Pay Commission HRA TA Arrier) नहीं दिया जाएगा। असली नुकसान यहीं से शुरू होता है।
कैलकुलेशन से समझिए पूरा नुकसान

मान लीजिए किसी कर्मचारी की 1 जनवरी 2026 को बेसिक सैलरी ₹80,800 है और डीए 60% है।
60% डीए का मतलब हुआ ₹48,480। यानी कुल सैलरी (बेसिक+डीए) ₹1,29,280।

अभी एचआरए 30% (X कैटेगरी शहर) के हिसाब से मिलता है:
30% of ₹80,800 = ₹24,240 प्रति माह।

अब मान लें फिटमेंट फैक्टर 2.5 लागू होता है।
नई बेसिक सैलरी = 80,800 × 2.5 = ₹2,02,000

लेकिन डीए 25% से नीचे आने पर एचआरए 30% से घटकर 24% हो जाता है।
तो नया एचआरए = 24% of ₹2,02,000 = ₹48,480

अब फर्क देखिए, पुराना एचआरए ₹24,240 था और नया होना चाहिए ₹48,480
यानी प्रति माह लगभग ₹24,230 का अंतर।

अगर 18 महीने तक एचआरए का एरियर नहीं मिला, तो:
₹24,230 × 18 = ₹4,36,140 का नुकसान सिर्फ एचआरए में।

अब टीए जोड़ दें। मान लें ₹3,000 महीना का फर्क:
₹3,000 × 18 = ₹54,000।

कुल संभावित नुकसान = ₹4,36,140 + ₹54,000 ≈ ₹4.90 लाख।

यानी 18 महीने की देरी में 4.5 से 5 लाख रुपए तक का झटका लग सकता है।

अगर डीए मर्ज हो जाए तो क्या होगा?

अगर 60% डीए को 1 जनवरी 2026 से बेसिक में जोड़ दिया जाए:
नई बेसिक = ₹80,800 + 60% = ₹1,29,280।

अब 24% एचआरए लगेगा
₹1,29,280 × 24% = ₹31,027।

इस स्थिति में एचआरए का अंतर कम हो जाएगा और कुल नुकसान घटकर लगभग 1 से 1.5 लाख के बीच रह सकता है।

यही वजह है कि कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि डीए को तुरंत बेसिक में मर्ज किया जाए। डॉ. पटेल का तर्क साफ है कि रिपोर्ट जब आए, तब आए... लेकिन देरी का बोझ कर्मचारियों पर नहीं पड़ना चाहिए।

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