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तेंदुओं का नया ठिकाना! यूपी के इस जिले में 2000 हेक्टेयर बन रहा है प्रदेश का पहला लेपर्ड सफारी, जानें क्या है खास

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तेंदुआ



पीयूष दुबे, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर), दुधवा टाइगर रिजर्व और इटावा के लायन सफारी की तर्ज पर पीलीभीत-शाहजहांपुर के दो हजार हेक्टेयर के जंगल में प्रदेश का पहला लेपर्ड सफारी बनाया जाएगा। सामाजिकी वानिकी विभाग के पीलीभीत और शाहजहांपुर में फैले जंगल में करीब 25 किलोमीटर सफारी रूट बनाया जाएगा, जिस पर सफारी वाहन दौड़ेंगे और वे लेपर्ड के दीदार कर सकेंगे।

इसके अलावा वहां पर आठ लेपर्ड की क्षमता वाला लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा, जहां पर रेस्क्यू किए गए लेपर्ड को रखने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। जिले में 941 हेक्टेयर वन क्षेत्र और शाहजहांपुर में 1060 हेक्टेयर वन क्षेत्र सामाजिकी वानिकी के अंतर्गत है। इसमें करीब चार से पांच तेंदुए रहते हैं।
डेटा टेबल



   प्रोजेक्ट फीचर
   आंकड़े/विवरण


   कुल जंगल क्षेत्र
   2001 हेक्टेयर


   सफारी ट्रैक
   25 किलोमीटर


   सुरक्षा घेरा
   30 किलोमीटर (चेन फेंसिंग)


   मुख्य जिले
   पीलीभीत (941 हेक्टेयर) और शाहजहांपुर (1060 हेक्टेयर)




लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व आसपास होने की वजह से यहां पर इन दोनों स्थानों से तेंदुओं का आवागमन रहता है। इस 2001 हेक्टेयर के जंगल के लेपर्ड सफारी प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है, जिसमें एक कोर सफारी इंफ्रा स्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिसमें दो हजार हेक्टेयर के जंगल की फेंसिंग करीब 30 किलोमीटर की होगी।

इसमें दोहरी लेयर की चेन लिंक फेंसिंग होगी, जिससे तेंदुए लेपर्ड सफारी से बाहर नहीं जा सकें। इसके अलावा 25 किलोमीटर के सफारी रूट को बनाने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च करने की योजना, जिसमें यह भी ध्यान रखा जाएगा कि जंगल का अधिकांश हिस्सा कवर हो जाए। साथ ही पेड़ों को न के बराबर काटना पड़े।

पहले चरण में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से पांच इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन किया जाएगा, जिसमें जीपीएस व रेडियो की सुविधा रहेेगी। उसमें फायर इंस्टीग्यूशर, फर्स्ट एड किट और सोलर चार्जिंग की व्यवस्था रहेगी। लेपर्ड सफारी में आने वाले पर्यटकों के लिए डिजिटल टिकट काउंटर, हेल्प डेस्क, शौचालय, एंट्री प्लाजा आदि की सुविधाएं रहेंगी, जिससे उनको सहजता रहा।

वन मंत्री डा. अरुण कुमार के विशेष प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए तैयारियां शुरू हो गईं। इस प्रोजेक्ट में 48 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके प्रस्ताव को डीएफओ के स्तर से फील्ड डायरेक्टर और मुख्य वन संरक्षक को भेजा जाएगा, वहां से संस्तुति मिलने के बाद शासन को भेजा जाएगा। शासन से अनुमति मिलने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा।
लेपर्ड रेस्क्यू व रिहैबिलीटेशन सेंटर

करीब सात करोड़ रुपये की लागत से आठ तेंदुओं को रखने वाला लेपर्ड रिहैबिलीटेशन सेंटर बनाया जाएगा। इसमें तेंदुओं के लिए क्वारंटीन व आइसोलेशन केज बनाई जाएंगीं। पशु चिकित्सालय, ओटी रूम, ट्रेनिंग हाल आदि की व्यवस्था की जाएगी। इससे प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी तेंदुओं को यहां लाकर इलाज मुहैया कराया जाएगा।




लेपर्ड सफारी प्रोजेक्ट का अनुमानित एस्टीमेट तैयार कर लिया गया। वन विभाग के फील्ड डायरेक्टर व मुख्य वन संरक्षक की संस्तुति के बाद शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। शासन से अनुमति मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।

- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिकी वानिकी





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