UP में अब मत्स्य पलकों का भी होगा बीमा, यूपी फिश फार्मर एप से मिलेगी सुविधा
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/24/article/image/fish-eyelashes-1771932055707_m.webpमो. नफीस खां, शुजागंज (अयोध्या)। अब सिर्फ खेतों की फसल नहीं बल्कि मत्स्य पालकों का भी बीमा होगा। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालकों के लिए बीमा की शुरुआत की है। मत्स्य पालकों के लिए यूपी फिश फार्मर एप बनाया गया है। इस पर मत्स्य पलकों का बीमा कराया जा सकता है।
बाढ़, बारिश, पानी की बीमारी या किसी तकनीकी चूक से तालाबों की मछलियां मर जाती हैं। इससे मत्स्य पालकों को भारी नुकसान होता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए अब बीमा कराया जा रहा है। मछली पालन करने वाले इसका फायदा उठा सकते हैं।
इस योजना के तहत मत्स्य पालक अब अपना बीमा करवा सकेंगे। प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य कारण से मछलियों को नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा मिलेगा। न्यू इंडिया कंपनी में इसका बीमा होगा,और इसकी किस्त सरकार जमा करेगी। अब हर मत्स्य पालक अपनी इकाई को बीमा कवरेज में ला सकता है।
रुदौली में दस हजार टन मछली का होता है उत्पादन
रुदौली में मछलियों का पालन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। अभी रुदौली में सरकारी और प्राइवेट लगभग 1000 हेक्टेयर तालाब बने हुए है। जिनमें मछली का पालन किया जा रहा है। एक हेक्टेयर में 50 कुन्तल मछलियों का उत्पादन किया जाता है। एक साल में लगभग दस हजार टन मछली का उत्पादन किया जा रहा है।
बोले मत्स्य पालक
शुजागंज के मत्स्य पालक मंसूर आलम अंसारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब बनाया और मछली का कारोबार शुरू किया। मन में हमेशा डर बना रहा है। क्योंकि यह कच्चा कारोबार है। कभी भी नुकसान हो सकता है। लेकिन अब इस योजना का फायदा मिलेगा, यह अच्छा है। उत्तर प्रदेश मत्स्य जीवी सहकारी संघ प्रबंध कमेटी के सदस्य गयाशंकर कश्यप ने बताया कि यूपी फिश फार्मर एप बेहतर है।
इससे मत्स्य पालकों को राहत मिलेगी, क्योंकि मत्स्य पलकों को बीमित किया जाना बड़ी बात है। कई बार मत्स्य पालकों को काफी नुकसान होता था। उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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वही इस संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण सुषमा निषाद ने बताया कि मत्स्य किसानों के लिए यूपी फिश फार्मर एप के माध्यम से पहले अपना पंजीकरण करना होगा। बताया कि अब तक 1857 मत्स्य पालको ने अपना पंजीकरण कराया है जिसे एनएफपीपी हैदराबाद भेजा जा चुका है।
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