उत्तराखंड सरकार की नई एसओपी: कार्मिकों से दुर्व्यवहार करने वालों पर FIR, होंगे ब्लैक लिस्ट
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/25/article/image/cm-dhami-1772028939837_m.webpमानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। शिक्षा निदेशालय में निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद शासन ने कार्मिकों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाया है। इसके लिए राजकीय कार्यालयों में अधिकारियों, कर्मचारियों की सुरक्षा, बचाव एवं प्रवेश नियंत्रण को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी पर तैनात किसी भी कार्मिक के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या गाली-गलौच करना दंडनीय अपराध होगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी साथ ही उन्हें परिसर से तुरंत निष्कासित करते हुए ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। गृह विभाग उचित समझने पर जोखिम वाले कार्यालयों का वार्षिक सुरक्षा आडिट भी कराएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से जारी एसओपी में स्पष्ट किया गया कि सचिवालय व विधानसभा समेत अन्य ऐसे राजकीय कार्यालय, जहां पूर्व से सुरक्षा की व्यवस्था विद्यमान है, वहां यह एसओपी लागू नहीं होगी। नई एसओपी के दायरे में आमजन, निजी ठेकेदार, जन प्रतिनिधियों, उनके समर्थकों सहित सभी आगंतुक आएंगे। एसओपी के अनुसार कार्यालय परिसर में आमजन के वाहनों का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।
वीआइपी अथवा दिव्यांगजन के वाहनों को अंडर-व्हीकल मिरर द्वारा सघन जांच के बाद ही प्रवेश अनुमन्य किया जाएगा। सभी कार्यालयों में डिजिटल आगंतुक प्रबंधन प्रणाली (वीएमएस) लागू की जाएगी। कार्यालयों में आने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ उन्हें मिलाकर अधिकतम तीन व्यक्ति ही अधिकारी के कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में उच्च गुणवत्ता के सीसी कैमरे लगाए जाएंगे। फारेंसिक पहचान सुनिश्चित करने को इसकी रिकार्डिंग संभाल कर रखी जाएगी।
दो माह के भीतर करनी होगी विवेचना
किसी कार्यालय में यदि कार्मिक के साथ दुर्व्यवहार की घटना होती है तो घटनास्थल को तुरंत सीज किया जाएगा। यहां फटे दस्तावेज व फर्नीचर, जैसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। कार्यालय द्वारा विवेचक को फुटेज सौंपी जाएगी। घायल कार्मिक को चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए मेडिको-लीगल केस दर्ज किया जाएगा। ऐसे प्रकरणों की विवेचना इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी ही करेंगे। यह विवेचन दो माह के भीतर करनी होगी।
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