दिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी के बाद अब मेरठ में होगा ये बड़ा बदलाव, बदलने वाली है शहर की सूरत
https://www.jagranimages.com/images/2026/02/25/article/image/Meerut-1772029131003_m.webpदिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी के बाद अब मेरठ में होगा ये बड़ा बदलाव
जागरण संवाददाता, मेरठ। नमाे भारत और मेरठ मेट्रो के संचालन से दिल्ली तक बेहतर कनेक्टिविटी के साथ कम समय में लोग यात्रा कर रहे हैं, लेकिन शहर के अंदर की ट्रैफिक व्यवस्था अभी जाम युक्त और असुरक्षित है। तेज रफ्तार का सुहाना सफर करके आने वाले लोग चौराहों पर जाम में फंस रहे हैं। अभी तो ये शुरुआत है, आगे दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम सहित बाहरी जनपदों से लोग मेरठ आएंगे।
फीडर सेवाओं में वृद्धि होगी तो ये समस्या विकराल रूप लेगी। इसे देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने यातायात नियंत्रण और जाम मुक्त व्यवस्था बनाने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। इस कड़ी में सिग्नल प्रणाली से छूटे सभी चौराहों को आइटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम ) के कंट्रोल रूप से जोड़ने की तैयारी है।
कमिश्नर भानू चंद्र गोस्वामी ने मेडा, नगर निगम और ट्रैफिक विभाग को सभी चौराहों को आइटीएमएस योजना में कवर करने का एक समग्र प्रस्ताव बनाकर जल्द प्रस्तुत करने के लिए कहा है। योजना के तहत सभी चौराहों को 360 डिग्री पर घूमने वाले हाइटेक वायरलैस कैमरों से लैस किया जाएगा।
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प्रत्येक चौराहे पर 10 से 15 कैमरे लगाए जा सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि सिर्फ चौराहे तक इनकी पहुंच न रहे। चौराहे से जुड़े सभी मार्गों पर भी इनकी नजर रहे। कैमरे की मदद से कंट्रोल रूम में बैठकर ट्रैफिक पुलिस न केवल रीयल टाइम में यातायात की स्थिति देखकर उसे नियंत्रित कर सकेगी बल्कि ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों को ई-चालान भी होंगे।
इसके अलावा अपराधिक घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। मेडा ने 75 चौराहों की सूची तैयार की है। वायरलेस तकनीक के कैमरे वहां भी लगाए जा सकेेंगे जहां केबल बिछाना मुश्किल है। वायरिंग फाल्ट की रोज-रोज की समस्या से छुटकारा भी मिलेगा।
इनमें से कुछ कैमरे फेस डिटेक्शन तकनीक के होंगे जो भीड़ में भी वांछित अपराधियों की पहचान करने में सक्षम होंगे। नाइट विजन क्षमता के कारण ये कैमरे रात के अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीरें रिकार्ड कर सकेंगे। पावर कट होने पर उनमें बैकअप की सुविधा भी होगी। संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों की मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए इन कैमरों का डेटा सीधे पुलिस के डेटाबेस से लिंक रहेगा।
शहर का 60 प्रतिशत हिस्सा आइटीएमएस से छूट
अभी तक सिग्नल प्रणाली के तहत शहर के चौराहों पर यातायात संचालन तेजगढ़ी चौराहा, डिग्गी तिराहा, एल ब्लाक तिराहा, बच्चा पार्क चौराहा, गांधीबाग चौराहा, हापुड़ अड्डा, जेलचुंगी और कमिश्नर आवास चौराहा पर ही हो रहा है।
शहर का करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से छूटा हुआ है, जिसमें माधव चौक, बेगमपुल, रेलवे रोड चौराहा, फुटबाल चौराहा, शापरिक्स माल चौराहा, बिजली बंबा बाइपास चौराहा, साकेत इमली चौराहा, सर्किट हाउस चौराहा, मवाना रोड चौराहा, गंगानगर तिराहा, कसेरूबक्सर चौराहा, कंकरखेड़ा शिवचौक चौराहा, टीपीनगर तिराहा सहित कई और प्रमुख चौराहे हैं। जिन पर अभी चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही खड़े होकर पुराने ढर्रे से यातायात संचालित कर रहे हैं। //B//B
48 करोड़ हैं, जरूरत 100 करोड़ से अधिक की
नगर निगम को आइटीएमएस योजना के विस्तार के लिए शासन से 48 करोड़ रुपये मिले हैं, लेकिन अधिकारियों की दुविधा ये है कि शहर के सभी चौराहों को इंटीग्रेट करने पर करीब 100 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान है। ऐसे में दो विकल्पों पर मंथन चल रहा है।
एक तो जो धनराशि मिली है, उससे कुछ चौराहे कवर कर लिए जाएं। बचे हुए चौराहों के लिए शासन से धनराशि मांग ली जाए। यानी चरणबद्ध तरीके से योजना को धरातल पर उतारा जाए। दूसरा विकल्प यह है कि सभी चौराहों के लिए एक मुश्त धनराशि मांग कर एक साथ काम किया जाए। दोनों ही तरह के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाएंगे।
नमो भारत-मेट्रो के संचालन से शहर का आवागमन तीव्र होगा। ऐसे में सुगम और सुरक्षित यातायात मुहैया कराने के लिए आइटीएमएस का विस्तार करने की योजना है। शहर के प्रत्येक चौराहे को सिग्नल प्रणाली, वायरलैस कैमरे से युक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। मेडा, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम तीनों मिलकर काम कर रहे हैं। समग्र प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। -प्रमोद कुमार सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम।
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