LHC0088 Publish time 2026-2-25 21:56:37

Nepal Elections: निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान को सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार, 5 मार्च को वोटिंग

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निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान को सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार। (एएनआई)






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने कमर कस ली है। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। परंपरागत सुरक्षा के साथ-साथ इस बार आईटी सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। नेपाली सेना और नेपाल पुलिस ने समर्पित आईटी सेल स्थापित किए हैं ताकि भ्रामक सूचनाएं, डीपफेक, इंटरनेट मीडिया पर जोड़-तोड़ वाली सामग्री से जुड़े खतरों को रोका जा सके।

अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के प्रेस सलाहकार राम रावल ने इस ऐतिहासिक तैनाती पर कहा, \“\“सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया है कि देश के चुनावी इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।\“\“
सुरक्षा बलों की कुल संख्या और उनकी तैनात

[*]कुल सुरक्षाकर्मी की संख्या लगभग 3,38,000
[*]नेपाली सेना ने 79,727 जवानों को तैनात किया


आपात स्थितियों के लिए \“स्टैंडबाय\“ पर अतिरिक्त बल मतदान केंद्रों का सुरक्षा वर्गीकरण :

कुल 10,967 मतदान केंद्रों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
श्रेणी मतदान केंद्रों की संख्या

अत्यधिक संवेदनशील 3,680, संवेदनशील 4,442, सामान्य 2,845
1.89 करोड़ मतदाता चुनेंगे देश की नई सरकार

इस बार देश के भविष्य का फैसला करने के लिए कुल 1.89 करोड़ पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह चुनाव प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों को चुनने के लिए आयोजित किया जा रहा है। चुनावी संरचना और मतदान प्रणाली नेपाल की संसद की चयन प्रक्रिया दो अलग-अलग प्रणालियों का मिश्रण है, जिसे नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है।

संसद के कुल 275 सदस्यों में से 110 सदस्यों का चयन समानुपातिक प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। चयन प्रणाली सीटों की संख्या विवरण प्रत्यक्ष मतदान 165 मतदाता सीधे अपने क्षेत्र के उम्मीदवार को वोट देते हैं। समानुपातिक प्रणाली 110 पूरे देश में राजनीतिक दलों को मिले कुल वोटों के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं।
समानुपातिक प्रतिनिधित्व क्यों महत्वपूर्ण है?

इस प्रणाली की कुछ खास विशेषताएं निम्नलिखित हैं -

अल्पसंख्यकों की भागीदारी: यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि संसद में अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों का प्रतिनिधित्व हो।

छोटे दलों को अवसर: इसके जरिये उन छोटे राजनीतिक दलों को भी सदन में जगह मिल पाती है, जो शायद प्रत्यक्ष चुनाव में बड़ी जीत हासिल न कर पाएं, लेकिन उन्हें जनता का एक निश्चित प्रतिशत वोट प्राप्त हो।

राष्ट्रव्यापी जनाधार: समानुपातिक प्रतिनिधित्व सीटों का निर्धारण किसी एक क्षेत्र विशेष के बजाय देश भर में पार्टी को मिले कुल वैध वोटों के आधार पर किया जाता है। इस चुनावी प्रक्रिया का उद्देश्य एक ऐसी समावेशी संसद का निर्माण करना है, जहां देश के हर वर्ग की आवाज सुनी जा सके।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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