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मध्य प्रदेश में बढ़ी गिद्धों की संख्या, 13500 से अधिक हुई संख्या; सबसे ज्यादा इस जिले में

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मध्य प्रदेश में बढ़ी गिद्धों की संख्या, 13500 से अधिक हुई संख्या (फाइल फोटो)



जेएनएन, भोपाल। मध्य प्रदेश बाघ, तेंदुआ और चीतों के बाद गिद्धों की संख्या के मामले में भी अव्वल प्रदेश बना हुआ है। 20 से 22 फरवरी तक हुई तीन दिवसीय गिद्ध गणना में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब प्रदेश में गिद्धों की संख्या 13,500 से अधिक हो गई है।

प्रदेश में गिद्धों की सात प्रजातियां गणना में चिह्नित हुईं। इनमें भारतीय लंबी चोंच वाला गिद्ध, लाल सिर वाला गिद्ध, मिस्त्र का गिद्ध, यूरेशियन ग्रिफान और हिमालयी ग्रिफान शामिल हैं। इनमें क्षेत्र की चट्टानों, वन क्षेत्रों और खुले भूभागों में निवास करने वाली स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां हैं।

वर्ष 2025 में प्रदेश भर में 12,710 गिद्ध गिने गए थे। इसी के साथ मध्य प्रदेश को सर्वाधिक संख्या के साथ \“गिद्ध प्रदेश\“ का दर्जा भी मिल गया था। प्रदेश में सबसे ज्यादा 1532 गिद्ध रायसेन जिले में पाए गए। पवई रेंज में 900 से अधिक, गांधी सागर में 700 से अधिक गिद्ध गिने गए हैं।

मध्य प्रदेश में गिद्धों की पहली गणना वर्ष 2016 में हुई थी। तब 7,028 गिद्ध थे। विशेषज्ञों के अनुसार आदर्श प्राकृतिक रहवास, सुरक्षित चट्टानें, प्रचुर भोजन और संरक्षण के उपायों के कारण गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी

गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी माना जाता है। ये मृत जानवरों के शरीर को खाकर पर्यावरण को साफ और बीमारियों से मुक्त रखने में सहायता करते हैं।

भोपाल के केरवा डैम में वर्ष 2014 से गिद्ध प्रजनन केंद्र संचालित हो रहा है। रायसेन का हलाली डैम क्षेत्र भी अनुकूल वातावरण की वजह से गिद्धों के लिए आदर्श रहवास है। यह क्षेत्र \“गिद्धगढ़\“ नाम से भी जाना जाता है। https://www.jagranimages.com/images/womenday2_780x100.jpghttps://www.jagranimages.com/images/womendayANI2_380x100.gif
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