LHC0088 Publish time 1 hour(s) ago

धामी कैबिनेट की बड़ी पहल, शोधित पानी से सिंचाई करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

https://www.jagranimages.com/images/2026/02/26/article/image/uk-cm-1772072409149_m.webp

सुरक्षित शोधित जल के उपयोग की नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, देहरादून। जल सुरक्षा, पर्यावरण और सतत विकास के उद्देश्य से उत्तराखंड ने महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के दिशा-निर्देशों के क्रम में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) से निकलने वाले शोधित जल के सिंचाई समेत विभिन्न कार्यों में उपयोग के दृष्टिगत सरकार नीति लेकर आई है।

धामी कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में इसकी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा उत्तराखंड को उच्च गुणवत्ता वाले शहद व अन्य मौन उत्पादों के अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने और किसानों की आय में बढोतरी के उद्देश्य से मौनपालन नीति को हरी झंडी दी गई। इसके तहत छह साल में 25,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक में 32 प्रस्ताव रखे गए थे, जिन पर स्वीकृति दी गई।

गैरसैंण में नौ मार्च से विधानसभा का बजट सत्र आहूत होने के कारण कैबिनेट के निर्णयों की ब्रीफिंग नहीं की गई। कैबिनेट ने विजन-2047 के तहत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में घरों और व्यावसायिक उद्यमों से निकलने वाले सीवेज (मलजल) का एसटीपी एवं एफएसटीपी में शोधन के बाद मिलने वाले उपचारित जल के उपयोग की नीति पर मुहर लगाई।

यह पानी खेतों की सिंचाई, सड़क निर्माण, पार्कों की सिंचाई, सड़कों पर छिड़काव, फायर फाइटिंग, स्टोन क्रशर, भवन समेत अन्य निर्माण कार्याें में उपयोग में लाया जाएगा। इससे इन कार्यों के लिए नलकूपों और नदियों पर पानी की निर्भरता कम होगी।
10 रुपये में मिलेगा 1000 लीटर पानी

एसटीपी से उपचारित पानी 10 रुपये प्रति हजार लीटर के हिसाब से उपलब्ध कराया जाएगा। प्रथम चरण में एसटीपी से उपचारित पानी टैंकरों के माध्यम से दिया जाएगा। द्वितीय चरण में एसटीपी से पानी ले जाने के लिए नहरों व पाइलाइन का जाल बिछेगा। अंतिम चरण में सभी एसटीपी में और अधिक शोधन संयंत्र स्थापित कर पानी को पीने योग्य भी बनाया जाएगा। अभी तक राज्य में संचालित 70 एसटीपी से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 270 एमएलडी उपचारित पानी पानी को नदियों में छोड़ दिया जाता है।
1.10 लाख करोड़ होगा बजट का आकार

राज्य के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर भी कैबिनेट में चर्चा हुई। पिछली बार के मुकाबले इस बार नए बजट में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी को स्वीकृति दी गई। इस बार बजट का आकार 1.10 लाख करोड़ के आसपास रहने की संभावना है। बजट के आकार में संशोधन के लिए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री धामी को अधिकृत किया है। विधानसभा के बजट सत्र में 11 मार्च को बजट पेश होगा।
कैबिनेट के ये भी महत्वपूर्ण निर्णय

[*]सेब की अत्याधुनिक नर्सरी विकास योजना को मंजूरी।
[*]11 नगर निगमों में एक-एक पर्यावरण अभियंता की संविदा के आधार पर होगी नियुक्ति।
[*]उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड के ढांचे में 13 पदों के सृजन को मंजूरी।
[*]मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना में 21 अशासकीय अनुदानित महावद्यिालयों को शामिल करने का निर्णय।
[*]उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित होगी स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना
[*]समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड संशोधन विधेयक को प्रख्यापित करने को मंजूरी
[*]बलात्कार व पाक्सो अधिनियम में लंबित अपराधों के शीघ्र निबटारे को विकासनगर, काशीपुर व नैनीताल में स्थापित होंगी फास्ट ट्रेक कोर्ट।


यह भी पढ़ें- देवभूमि के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं, \“ऑपरेशन कालनेमी\“ से होगा सनातन विरोधियों का हिसाब: CM धामी

यह भी पढ़ें- विराट हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची का बड़ा बयान, \“संघ न होता, तो अयोध्या में नहीं बनता राम मंदिर\“

यह भी पढ़ें- AI समिट हंगामे पर सीएम धामी का Congress पर निशाना, बोले- कांग्रेस को फूटी आंख नहीं सुहा रही देश की प्रगति https://www.jagranimages.com/images/womenday2_780x100.jpghttps://www.jagranimages.com/images/womendayANI2_380x100.gif
Pages: [1]
View full version: धामी कैबिनेट की बड़ी पहल, शोधित पानी से सिंचाई करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड