Chikheang Publish time 2026-2-26 12:57:06

बसपा मुखिया मायावती के बाद विधायक Umashankar Singh के पक्ष में उतरे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव



डिजिटल डेस्क, लखनऊ। कैंसर पीड़ित बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ और अन्य स्थानों पर आवास व प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद राजनीति बेहद गरम हो गई है।

योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह व बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। दलगत राजनीति के ऊपर उठकर अखिलेश यादव की इस प्रतिक्रिया को मील के पत्थर के रूप में भी देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर उमाशंकर सिंह के आवास व प्रतिष्ठानों पर छापों को भाजपा की सरकारी डकैती बताया है। उन्होंने इसमें दिनेश प्रताप सिंह के मीडिया के दिए गए बयान को भी टैग किया है।

अखिलेश यादव ने लिखा है, भाजपाई छापे सरकारी डकैती होते हैं।भाजपा के छापे लोगों के कमाये गये पैसों को लूटने का काम करते हैं। भाजपाई जहां भी देखते हैं कि कहीं धन-दौलत जमा होने की संभावना हो सकती है, वहां अपनी एजेंसियां लेकर पहुंच जाते हैं। भाजपाई हृदयहीन हैं, इसीलिए संवेदनहीन भी हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि भाजपाई यह भी नहीं देखते हैं कि कोई व्यक्ति किसी अति गंभीर बीमारी से जूझ रहा है या किसी और परेशानी या दिक्कत का सामना कर रहा है। इसके विपरीत धन के लालची भाजपाई ऐसी ‘आपदा’ से जूझ रहे व्यक्ति के विपरीत हालातों में ‘अवसर’ तलाश लेते हैं और जब व्यक्ति अपने सबसे मुश्किल दौर में होता है, तब ही उसे टारगेट करते हैं, जिससे वो कोई विरोध-प्रतिरोध न कर पाये और ये उसका धन-मान सब लूट सकें।

अखिलेश ने लिखा, भाजपाइयों के लिए बहन-बेटी का मान भी कुछ नहीं है। भाजपाई पीड़ित को उत्पीड़ित करने का कुकृत्य करते हैं। सच तो ये है कि 2047 की बात करनेवाले जानते हैं कि उनका 2027 भी पार नहीं होगा। लखनऊ हो या दिल्ली कोई भी सत्ताइस के पार नहीं जाएगा, इसीलिए ये पैसे बटोरने में लग गये हैं।
भाजपा किसी की भी सगी नहीं

उन्होंने आगे कहा कि अब तो भाजपाई भी हमारी बात दोहरा रहे हैं कि ‘भाजपा किसी की भी सगी नहीं है!’ अब तो भाजपा के परंपरागत वोटर भी भाजपा से छिटक गये हैं। पूज्य शंकराचार्य जी के अपमान और उनके विरुद्ध घिनौनी साजिश करने के कारण धर्मरत समाज भाजपा के खिलाफ खड़ा हो गया है, कारोबारी समाज जीएसटी, भ्रष्टाचार और बेतहाशा उगाही के कारण भाजपा से विमुख हो गया है और आज तो सत्ता सजातीय समाज भी इस घृणित छापे के बाद पूरी तरह भाजपा को नकार रहा है।
दिल्ली के षड्यंत्र का होगा पर्दाफाश

किसी के गंभीर हालातों में डाला गया ये छापा किसी भी दृष्टि से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। इसके पीछे दिल्ली के षड्यंत्र का एक न एक दिन पर्दाफाश होकर रहेगा। भाजपावाले लोगों को दुख देने के लिए कभी झूठे मुक़दमे लगवाते हैं, कभी संकट के समय जानबूझकर छापे पड़वाते हैं। कल ये दर्द विपक्ष के लोगों ने झेला था, आज भाजपा के अंदर ही लोग इसका शिकार हो रहे हैं। आज भाजपा के लोगों को पता चल रहा है कि जिनकी प्रवृत्ति डसने-काटने की होती है, ऐसे ‘दंश-डंक’ वालों को पालने-पोसने का हश्र होता क्या होता है, उसके दुष्परिणाम क्या होते हैं।
ऐसी घटनाओं से गहरा मानसिक उत्पीड़न

अखिलेश यादव ने कहा कि पहले से शारीरिक रूप बेहद कमजोर हो चुके व्यक्ति का ऐसी घटनाओं से गहरा मानसिक उत्पीड़न होता है, जो आघात-अपघात का कारण बनता है, ऐसे में अगर कुछ भी अप्रिय घटित होता है तो इसके दोषी भाजपाई होंगे। स्थानीय स्तर पर भी भाजपा के कट्टर समर्थक तक, इस छापे की निंदा कर रहे हैं और समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। ये एक बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अक्षम्य कुकृत्य है।

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परिवार वाले ही परिवार वालों का दुख-दर्द समझ सकते

पीड़ित परिवार के साथ हमारी गहरी सहानुभूति है, संकट के इन क्षणों में हम किसी भी तरह की सहायता-मदद करने के लिए तत्पर हैं। हम पीड़ित-परिवार की हर अपेक्षा पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे क्योंकि परिवारवाले ही परिवारवालों का दुख-दर्द समझ सकते हैं।

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भाजपा ने संवेदनहीनता की सभी सीमाएं लांघ दी हैं, यही उसके अंत का परिचायक है। सत्ता के मद में डूबे भाजपाइयों के इस घोर अनैतिक व बेहद गिरे हुए कुकृत्य को देखकर, आज तो रावण भी दसों सिर झुकाकर कहीं पाताल में खड़ा होगा।

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