cy520520 Publish time 2026-2-26 13:01:09

दिल्ली Vs हिमाचल पुलिस: 3 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के गिरफ्तारी, 25 घंटे तक चली खींचतान, आधी रात को जज के घर पहुंचे अधिकारी, जानें क्या है पूरा मामला

दिल्ली और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच बुधवार सुबह 5 बजे शुरू हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा अगले दिन सुबह 6 बजे तक चला। यह पूरी जंग उन तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लेकर थी, जिन्होंने पिछले हफ्ते दिल्ली के \“AI इम्पैक्ट समिट\“ में शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया था।



इस ड्रामे की शुरुआत तब हुई, जब दिल्ली पुलिस की एक टीम इन तीन कार्यकर्ताओं को पकड़ने के लिए शिमला से 120 Km दूर रोहड़ू पहुंची। हिमाचल पुलिस का कहना था कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें बिना बताए यह कार्रवाई की, जो नियमों के खिलाफ है।



कैसे शुरू हुई यह \“जंग\“?




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बुधवार सुबह 5 बजे दिल्ली पुलिस की टीम चार गाड़ियों में चिड़गांव (शिमला) के एक रिसॉर्ट पहुंची और तीनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।



रात के करीब 1:30 बजे, दिल्ली पुलिस इन तीनों को लेकर जज के घर पहुंची। जज ने दिल्ली पुलिस को \“ट्रांजिट रिमांड\“ दे दी, यानी उन्हें आरोपियों को दिल्ली ले जाने की अनुमति मिल गई।



थाने में बहस और \“किडनैपिंग\“ का आरोप



असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर निकलने लगी।



शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस की गाड़ी को रोक लिया। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की तलाशी लेना चाहते हैं।



शिमला पुलिस चाहती थी कि दिल्ली पुलिस ने जो डिजिटल सबूत (DVR) जब्त किए हैं, वे उन्हें सौंप दिए जाएं। बहस इतनी बढ़ गई कि हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस पर ही \“अपहरण\“ (Kidnapping) का केस दर्ज कर दिया।



वीडियो में कैद हुई तीखी बहस



मौके पर मौजूद वीडियो में दिल्ली पुलिस के अधिकारी कह रहे थे, “हम अपना काम कर रहे हैं, आप एक सरकारी कर्मचारी को रोक रहे हैं।“ जवाब में हिमाचल पुलिस के अफसर ने कहा, “हमने आप पर केस दर्ज किया है, आप तीन लोगों को किडनैप कर रहे हैं, जांच में शामिल होइए।“



बॉर्डर पर नाकाबंदी और आखिर में समझौता



सुबह 4 बजे दिल्ली पुलिस जब आरोपियों को लेकर दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी, तो शिमला पुलिस ने शोघी बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर फिर से रास्ता रोक दिया।



हिमाचल पुलिस उस गाड़ी की चाबी मांग रही थी, जिसमें सबूत और हथियार रखे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मना कर दिया।



दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि उनके पास आरोपियों को दिल्ली पहुंचाने के लिए सिर्फ 18 घंटे हैं, जिसमें से काफी समय बर्बाद हो चुका है।



कैसे खत्म हुआ विवाद?



आखिरकार, दिल्ली पुलिस ने जब्त किए गए सबूतों की एक \“लिस्ट\“ (Seizure Memo) शिमला पुलिस के साथ साझा की। हालांकि, उन्होंने डिजिटल सबूत देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इसके लिए लिखित में कानूनी मांग करनी होगी। इसके बाद सुबह 6 बजे दिल्ली पुलिस की टीम आरोपियों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो सकी।



दिल्ली पुलिस के ACP राहुल विक्रम ने बाद में मीडिया को बताया कि शिमला पुलिस कानूनी तौर पर डिजिटल सबूत या उनकी गाड़ियों को जब्त नहीं कर सकती। उन्होंने आगे कहा कि सबूत हासिल करने के लिए शिमला पुलिस को लिखित एप्लीकेशन देनी होगा।
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