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HDFC Bank के पूर्व सीईओ आदित्य पुरी ने कहा- नौकरियों पर AI के खतरे को बढ़ाचढ़ाकर बताया जा रहा है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल बढ़ रहा है। एआई टूल्स कई ऐसे काम कर सकते हैं, जो अभी इनसान करता है। एआई कोडिंग करने में भी सक्षम है। इससे आईटी शेयरों में गिरावट दिख रही है। इनवेस्टर्स को डर है कि एआई टूल्स का असर आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है। मनीकंट्रोल ने आईटी के बढ़ते इस्तेमाल और उसके असर के बारे में जानने के लिए एचडीएफसी बैंक के पूर्व सीईओ आदित्य पुरी से बातचीत की। उनसे बैंकों की आज की सबसे बड़ी चुनौती के बारे में भी पूछा।



AI से कुछ नौकरियां जाएंगी तो नई नौकरियों के मौके बनेंगे



पुरी ने कहा कि उन्हें लगता है कि AI क्या कर सकता है और कितनी जल्दी कर सकता है, इस बारे में काफी बढ़ाचढ़ाकर बातें की जा रही हैं। इस वजह से इसे लेकर निगेटिविटी बढ़ी है। कहा जा रहा है कि इससे नौकिरयां जा सकती हैं। यह सही है कि इससे कुछ नौकरियां जा सकती हैं। लेकिन, इससे नई नौकरियों के मौके भी बनेंगे। एआई से ग्रोथ बढ़ेगी। अगर 60 फीसदी नौकरियों की जगह एआई का इस्तेमाल होगा तो इसका मतलब यह नहीं की 60 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी।




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यह कहना ठीक नहीं कि एआई इनसान की जगह ले लेगा



उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा है। ऐसी बातें सिर्फ इसलिए हो रही हैं, क्योंकि इसके बारे काफी बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है। यह सही है कि इससे कुछ बदलाव आएगा। लेकिन, नौकरियों पर इसके असर को बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है। एआई पूरी तरह से इनसान की जगह ले लेगा, यह कहना ठीक नहीं है। आपके पास एजेंटिक एआई होगा। लेकिन इनसान का इस्तेमाल खत्म नहीं होगा। अब इनसान और एआई मिलकर काम करेंगे। और यह सबकुछ कल होने नहीं जा रहा है। इसमें एक या दशक लगेंगे।



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बैंकों का ज्यादातर डिपॉजिट बाहर जाने वाला नहीं है



बैंकिंग इंडस्ट्री के बारे में उन्होंने कहा कि इंडिया में बैंकों की पहुंच अभी पूरी आबादी तक नहीं है। बैंकों के पास जमा पैसे में सेमी-अर्बन और रूरल इंडिया की बड़ी हिस्सेदारी है। इसमें स्मॉल बिजनेसेज भी शामिल हैं। इसलिए मेरा मानना है कि यह पैसा शेयरों और म्यूचुअल फंड्स में चला जाएगा। देश की आबादी का सिर्फ 6 फीसदी हिस्सा शेयर मार्केट में निवेश करता है। इसलिए बैंक के पास जमा पैसा बाहर नहीं जा रहा। पिछले कुछ समय से बैंकों के डिपॉजिट ग्रोथ में कमी आई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अब लोग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसे रखने की जगह म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में निवेश कर रहे हैं। इसमें सिप का बड़ा हाथ है।
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