Sikkim Earthquake: सिक्किम में भूकंप के दो झटकों से लोगों में दहशत, 10 सेकंड तक हिलती रही धरती
Sikkim Earthquake: सिक्किम में गुरुवार (26 फरवरी) को भूकंप के 4.6 और 3.5 तीव्रता वाले झटके महसूस किए गए। अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर 4.6 की तीव्रता वाला पहला भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र ग्यालशिंग जिले के युक्सोम से चार किमी उत्तर-पूर्व में 10 किलोमीटर की गहराई में था। अधिकारियों ने बताया कि मांगन जिले में दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर 3.5 तीव्रता वाला भूकंप का दूसरा झटका महसूस किया गया।इसका केंद्र गंगटोक से 11 किमी उत्तर-पश्चिम में 10 किमी की गहराई पर था। अधिकारियों ने बताया कि दोनों भूकंप में जानमाल के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। इस महीने की शुरुआत में 6 फरवरी को इसी इलाके में 4.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था। इसका सेंटर 27.31°N और 88.18°E पर 10 km की गहराई पर रिकॉर्ड किया गया था।
इसके अलावा 6 फरवरी के भूकंप के बाद चार घंटे और 30 मिनट के अंदर कम से कम 12 आफ्टरशॉक आए। इनकी मैग्नीट्यूड 2.2 से 4.0 के बीच थी, जो ज्यादातर मुख्य झटके से पूरब की दिशा में थे। सीस्मिक एनालिसिस के अनुसार, यह घटना टिस्टा फॉल्ट/लाइनेमेंट के पास और 18 सितंबर, 2011 को आए 6.9 मैग्नीट्यूड वाले भूकंप के दक्षिण में हुई थी।
संबंधित खबरें
न चीख न पुकार... दिल्ली में दरिंदे पति ने गर्भवती पत्नी समेत तीन मासूम बेटियों का गला रेता! सांस की नली तक कट गई अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 5:15 PM
HDFC Bank के पूर्व सीईओ आदित्य पुरी ने कहा- नौकरियों पर AI के खतरे को बढ़ाचढ़ाकर बताया जा रहा है अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 3:36 PM
Lucknow Murder: शराब के ठेके का लाइसेंस और ₹50 लाख की चोरी, अक्षत को लग गई थी अय्याशी की लत, इस वजह से ली बाप की जान! अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 3:00 PM
इस इलाके को कोलिजनल टेक्टोनिक्स की वजह से सीस्मिक रूप से बहुत अधिक एक्टिव माना जाता है। यहां इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे चली जाती है। रिपोर्ट्स से पता चला है कि एपिसेंट्रल एरिया में मॉडिफाइड मर्काली इंटेंसिटी (MMI) स्केल पर VI की मैक्सिमम इंटेंसिटी थी। जबकि एपिसेंटर से 250 km तक की दूरी पर II की कम इंटेंसिटी रिकॉर्ड की गई थी। फिलहाल अधिकारी वर्तमान स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
इस बीच, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) की 17 साल की स्टडी में चेतावनी दी गई है कि अगर 6.5 या उससे अधिक मैग्नीट्यूड का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज के कुछ हिस्सों में काफी नुकसान हो सकता है। IIT कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. निहार रंजन पात्रा की लीडरशिप में हुई इस रिसर्च में गंगा नदी के किनारे की जलोढ़ मिट्टी में लिक्विडेशन की ज्यादा संभावना पर जोर दिया गया है।
ये भी पढ़ें- NCERT Book Row: \“किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा\“; SC ने विवादित एनसीईआरटी किताब पर लगाया बैन, चेयरमैन को नोटिस जारी, केंद्र ने मांगी माफी
यह एक ऐसा फैक्टर है जो जमीन के कंपन को तेजी से बढ़ा सकता है। साथ ही इमारतों को अस्थिर कर सकता है। इंस्टीट्यूट की रिसर्च टीम ने गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से लगभग दो दशकों में इकट्ठा किए गए मिट्टी के सैंपल का एनालिसिस किया। कानपुर और प्रयागराज में 43 जगहों से सैंपल लिए गए। इनमें कानपुर और प्रयागराज में दो जगहों पर 30 से 40 मीटर और 80 मीटर की गहराई तक बोरहोल ड्रिल किए गए। ये कुछ खास इलाकों में इस्तेमाल होने वाले आम 10-30 मीटर से कहीं ज्यादा गहरे थे।
Pages:
[1]