वोटर लिस्ट जारी होने से पहले बंगाल में केंद्रीय बलों की एंट्री! कल से 240 कंपनियां पहुंचेंगी, चुनाव से पहले एक्शन मोड में EC
पश्चिम बंगाल में अभी तक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी होने वाली है, लेकिन उससे पहले ही राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती शुरू हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, कल से ही सेंट्रल फोर्स राज्य में आने वाली है, शुरुआती चरण में 240 कंपनियां केंद्रीय अर्धसैनिक बल की राज्य में भेजी जा रही हैं।पहले ऐसी खबर थी कि कंपनियां 1 मार्च तक बंगाल पहुंच जाएंगी। इसके बाद 10 मार्च तक 240 और कंपनियां भेजी जाएंगी। यानी कुल 480 कंपनियों की तैनाती की योजना है। लेकिन फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद से प्रदर्शन होने की संभावना को देखते हुए, कल से ही राज्य में सेंट्रल फोर्स आने वाली है।
बता दे कि इससे पहले चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस प्रशासन के साथ केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर बैठक की थी। आयोग का मकसद है कि वोट से पहले \“एरिया डॉमिनेशन\“ और \“कॉन्फिडेंस बिल्डिंग\“ की जाए, ताकि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो। खास तौर पर 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने वाली है। SIR प्रक्रिया के तहत तैयार की गई इस सूची को लेकर कुछ इलाकों में तनाव की आशंका जताई जा रही है। इसलिए आयोग पहले से तैयारी कर रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बलों की कंपनियां अलग-अलग जिलों में तैनात की जा रही हैं। पूर्व मेदिनीपुर में सबसे ज्यादा 14 कंपनियां पहुंच रही हैं। मुर्शिदाबाद में 12, मालदा में 10, बैरकपुर में 9, कोलकाता में 12, अलीपुरद्वार में 9 और हावड़ा व आसपास के इलाकों में भी कई कंपनियां तैनात होंगी। वहीं, उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण 24 परगना और सुंदरबन तक लगभग हर जिले में केंद्रीय बलों की मौजूदगी रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले भी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में केंद्रीय बल आते रहे हैं, लेकिन इस बार संख्या अधिक बताई जा रही है। ऐसा भी माना जा रहा है कि SIR पहली बार राज्य में किया जा रहा है, और इसके तहत बड़े नंबर में मतदाताओं का नाम काटे जाएंगे। ऐसे में आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वोटर लिस्ट जारी होने के बाद किसी तरह की हिंसा या अशांति न फैले।
चुनाव की घोषणा मार्च की शुरुआत में हो सकती है। इससे पहले सभी राजनीतिक पार्टियां तैयारी तेज कर दी हैं। कई जगह मौजूदा सरकार के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन भी देखने को मिले है। इन सब को देखते हुए केंद्रीय बलों की मौजूदगी साफ संकेत देती है कि आयोग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहता है।
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