पश्चिम बंगाल एसआईआर: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओड ...
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है, जिनमें 100-100 अधिकारी ओडिशा हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट से होंगे। इन अधिकारियों को उन न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल किया जाएगा, जिन्हें “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” (तार्किक असंगति) श्रेणी में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच और फैसला करने के लिए पहले से नियुक्त किया गया है।
पड़ोसी राज्यों से 200 न्यायिक अधिकारियों को बुलाने का फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और पश्चिम बंगाल के विशेष रोल पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता भी मौजूद थे।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की खंडपीठ ने 24 फरवरी को झारखंड और ओडिशा के उच्च न्यायालयों से न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल भेजने की अनुमति दी थी, ताकि चुनाव वाले राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के दावों और आपत्तियों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि 21 फरवरी की मध्यरात्रि तक तय की गई 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक असंगति) मामलों के निपटारे के लिए अंतिम मानी जाएगी।
पहले ही पश्चिम बंगाल की विभिन्न अदालतों से 532 न्यायिक अधिकारियों को मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए नियुक्त किया जा चुका है। इनमें से 273 अधिकारी फिलहाल इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
ओडिशा और झारखंड उच्च न्यायालयों से 200 और अधिकारियों के जुड़ने के बाद दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में और तेजी आने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची, न्यायिक जांच के लिए भेजे गए 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मामलों को छोड़कर प्रकाशित की जाएगी। न्यायिक प्रक्रिया की प्रगति के अनुसार पूरक सूची बाद में जारी की जाएगी।
न्यायिक अधिकारी जांच कार्य की प्रगति की दैनिक रिपोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंप रहे हैं, ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
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