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दिल्ली हाई कोर्ट का भुवन बाम से जुड़े ट्रेडम ...


नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने यूट्यूबर और एक्टर भुवन बाम को दी गई अंतरिम सुरक्षा का दायरा बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे भुवन बाम के नाम, तस्वीर, किरदार, आवाज और ट्रेडमार्क के कथित तौर पर बिना इजाजत इस्तेमाल के नए मामलों को हटा दें।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल-न्यायाधीश पीठ ने इस साल जनवरी में पारित एक पिछले अंतरिम आदेश के बावजूद लगातार डिजिटल उल्लंघन के आरोपों को संज्ञान में लेते हुए बाम और उनकी कंपनी 'बीबी की वाइन्स' द्वारा दायर एक वाणिज्यिक मुकदमे में यह आदेश पारित किया।




इससे पहले 13 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने कई प्रतिवादियों को बाम के नाम, तस्वीरों और ऑन-स्क्रीन किरदारों का इस्तेमाल कमर्शियल या निजी फायदे के लिए करने से और साथ ही 'बीबी की वाइन्स (भुवन बाम)' और 'बीबी की वाइन्स' जैसे रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करके सामान बेचने से रोक दिया था।
अपने ताजा आदेश में जस्टिस सिंह ने यह दर्ज किया कि यह नई अर्जी तब दायर की गई, जब विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बाम के व्यक्तित्व अधिकारों, छवि, किरदारों और आवाज के कथित तौर पर बिना अनुमति के इस्तेमाल के और भी मामले सामने आए। इनमें डीपफेक और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले वीडियो, साथ ही ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर मौजूद कमर्शियल लिस्टिंग भी शामिल हैं।




रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों और स्क्रीनशॉट्स की जांच करने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने यह माना कि वादियों ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला बनाया है।
आदेश में कहा गया, "वादियों ने प्रथम दृष्टया मामला साबित कर दिया है और सुविधा का संतुलन भी वादियों के पक्ष में है और यदि मांगी गई रोक नहीं दी जाती है, तो वादियों के साथ-साथ आम जनता के निर्दोष सदस्यों को भी अपूरणीय क्षति होगी।"
इसके अलावा, इसने 'जॉन डो' संस्थाओं को अगली सुनवाई तक बाम के व्यक्तित्व, प्रचार, ट्रेडमार्क या कॉपीराइट अधिकारों का उल्लंघन करने वाली किसी भी सामग्री या सामान को बनाने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने, बेचने या किसी अन्य तरीके से उसका दुरुपयोग करने से रोक दिया।




इसने गूगल एलएलसी को छह पहचाने गए यूट्यूब यूआरएल हटाने, फ्लिपकार्ट को दो प्रोडक्ट लिस्टिंग हटाने, स्पॉटिफाई इंडिया को तीन उल्लंघनकारी लिंक हटाने, मेटा प्लेटफॉर्म्स को तीन इंस्टाग्राम लिंक हटाने और ऑनलाइन मर्चेंडाइज विक्रेताओं बीट्रेंडी और स्वैग शर्ट्स को निर्दिष्ट अनधिकृत प्रोडक्ट लिस्टिंग हटाने का भी निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान, उपस्थित कुछ प्रतिवादियों ने कुछ यूआरएल को हटाए जाने पर आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि वह सामग्री अपवादों के दायरे में आती है और पैरोडी तथा कैरिकेचर के समान है। हालांकि, न्यायमूर्ति सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद, अगली सुनवाई के दौरान इस मुद्दे की अधिक विस्तार से जांच की जाएगी।
जज ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अगली तारीख पर इस मामले पर विचार किया जाएगा।




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