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कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, विद ...


कलबुर्गी। कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री और कलबुर्गी जिले के प्रभारी मंत्री प्रियांक खड़गे ने शनिवार को कहा कि यह गर्व की बात है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाला स्थानीय व्यंजन 'कलबुर्गी रोटी' अब विदेशों में निर्यात की जा रही है।
कलबुर्गी शहर के अरिविना माने सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए खड़गे ने ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा को निर्यात के लिए तैयार पैकेटबंद रोटियों की खेपों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन पैकेटों को डाक विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया ताकि उन्हें इंडिया पोस्ट के माध्यम से विदेशों में भेजा जा सके।




खड़गे ने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले 'कलबुर्गी रोटी' ब्रांड लॉन्च किया गया था, जिसके तहत 100 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 1,000 महिलाएं पारंपरिक ज्वार की रोटियां बनाने में लगी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि अब पुणे स्थित एक निर्यात कंपनी के माध्यम से अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया को रोटियों के निर्यात की व्यवस्था कर दी गई है, जिसे उन्होंने कलबुर्गी के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
मंत्री ने विशेष रूप से तैयार किए गए निर्यात पैकेटों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिन्हें इंडिया पोस्ट के माध्यम से विदेशों में भेजा जाएगा।




अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को प्रति माह 10,000 कलबुर्गी ज्वार की रोटियों के निर्यात की व्यवस्था की गई है, जबकि 5,000 रोटियां कनाडा भेजी जाएंगी। आने वाले दिनों में निर्यात की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने बताया कि 'कलबुर्गी रोटी' वर्तमान में अमेजन, कलबुर्गी रोटी की वेबसाइट, फ्रेंचाइजी आउटलेट्स और देशभर के स्थानीय बाजारों के माध्यम से बेची जा रही है।
कलबुर्गी रोटी ब्रांड की पहल से 100 से अधिक स्वयं सहायता समूह और 1,000 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। रोटी उत्पादन में लगी महिलाएं प्रति माह 15,000 से 20,000 रुपए तक कमा रही हैं, साथ ही शादियों और अन्य कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।




जिला प्रशासन ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए पुणे स्थित अष्टम ट्रेडर्स के साथ बातचीत की है। पहले चरण में, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को प्रति वर्ष एक लाख रोटियों का निर्यात करने का प्रस्ताव है, जिसमें मासिक निर्यात 10,000 से 25,000 रोटियों के बीच रहने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और निर्यातक के बीच समझौता हो चुका है।




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