'कॉकरोच जनता पार्टी' के X अकाउंट पर लगी रोक हट ...
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया अभियान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का आदेश देते हुए केंद्र सरकार द्वारा जारी ब्लॉकिंग आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध केवल असाधारण परिस्थितियों में ही लगाया जा सकता है और उसके लिए ठोस तथा तात्कालिक खतरे का होना आवश्यक है। यह आदेश CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा केंद्र सरकार के ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया गया।
सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। सरकार का तर्क था कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के दोबारा आयोजन से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचना और भ्रामक सामग्री फैलने की आशंका थी, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। सरकार ने अदालत से कहा कि अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का उद्देश्य संभावित अराजकता और भ्रम की स्थिति को रोकना था।
अदालत बोली- अब चिंता प्रासंगिक नहीं रही
हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जिस परिस्थिति का हवाला देकर अकाउंट को ब्लॉक किया गया था, वह अब समाप्त हो चुकी है और वर्तमान में ऐसा कोई तात्कालिक खतरा नहीं है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने को उचित ठहराए। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है। यदि किसी अभिव्यक्ति से वास्तविक और तत्काल सार्वजनिक खतरा पैदा नहीं होता, तो केवल आशंका के आधार पर उसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अहम टिप्पणी
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सरकार को सोशल मीडिया पर व्यक्त विचारों को नियंत्रित करने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग अत्यंत सावधानी से करना चाहिए। अदालत की टिप्पणी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
व्यंग्य और आलोचना भी लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा
'कॉकरोच जनता पार्टी' स्वयं को एक व्यंग्यात्मक और युवा-नेतृत्व वाला डिजिटल अभियान बताती है, जो राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करता है। अदालत ने संकेत दिया कि व्यंग्य, आलोचना और राजनीतिक अभिव्यक्ति भी लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें केवल इसलिए प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे सरकार की आलोचना करते हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून के दायरे में ही संरक्षित रहती है और किसी भी प्रकार की अवैध या हिंसा भड़काने वाली सामग्री को संरक्षण नहीं मिलता।
मई में शुरू हुआ था डिजिटल अभियान
'कॉकरोच जनता पार्टी' का मूल एक्स अकाउंट 15 मई को एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान के रूप में शुरू हुआ था। कुछ दिनों बाद, 21 मई को भारत में इस अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद अभियान से जुड़े लोगों ने 'Cockroach Is Back' नाम से नया अकाउंट शुरू किया, जिसने कुछ ही समय में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटा लिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस नए अकाउंट के 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
शिक्षा व्यवस्था और NEET को लेकर चलाया अभियान
CJP ने शिक्षा व्यवस्था, कथित संस्थागत खामियों और NEET 2026 से जुड़े विवादों को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय अभियान चलाया। संगठन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई और स्वयं को युवाओं की आवाज़ बताने का प्रयास किया। हालांकि, इन अभियानों से जुड़े आरोपों और मांगों पर सरकार की अपनी अलग राय रही है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।
डिजिटल अधिकारों पर अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी ब्लॉकिंग आदेशों की न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाएगा। अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी डिजिटल मंच को प्रतिबंधित करने से पहले सरकार को यह दिखाना होगा कि उससे वास्तविक, स्पष्ट और तात्कालिक खतरा उत्पन्न हो रहा है। यह निर्णय भविष्य में ऑनलाइन अभिव्यक्ति, व्यंग्य, राजनीतिक आलोचना और डिजिटल अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।
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Editorial Team
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