deltin55 Publish time Yesterday 23:56

देश से गद्दारी करने पर कितनी सजा मिलती है? यूट्यूबर ज्योति पर PAK के लिए जासूसी करने का आरोप


             
हिसार की रहने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923) की धारा तीन और चार के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत भी ज्योति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.


ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इन धाराओं का मतलब क्या है और अगर ज्योति का जुर्म साबित हो जाए तो उसे कितनी सजा मिल सकती है? आइए इसे एक्सपर्ट से समझते हैं.




हरियाणा में स्थित हिसार निवासी ज्योति मल्होत्रा की उम्र 33 साल है. वह यूट्यूबर और ट्रैवल ब्लॉगर के रूप में जानी जाती है. आरोप है कि इसी बहाने ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करती थी. ISI के साथ भारत की संवेदनशील जानकारियां साझा करने के आरोप में उसको 17 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया है. हिसार पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया था, जहां से पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया था.

      


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हिसार पुलिस का दावा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एजेंट सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोगों के जरिए अपने दुष्प्रचार को बढ़ावा देने की कोशिश करे हैं. इनमें ज्योति जैसे लोग शामिल हैं. उसको केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पकड़ा गया. वह कई बार पाकिस्तान जा चुकी है. यहां तक कि पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकवादी हमले से पहले भी उसने पाकिस्तान की यात्रा की थी और वहां के ऑपरेटिव से जुड़ी थी. इसके अलावा वह एक बार चीन भी जा चुकी है.



ज्योति मल्होत्रा को जिस आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट-1923) के तहत गिरफ्तार किया गया है, वह काफी पुराना कानून है. इस कानून का इतिहास अंग्रेजों के शासन काल से शुरू होता है. पहले इसी अधिनियम को द इंडियन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (एक्ट XIV)-1889 के नाम से जाना जाता था. उस वक्त इसका इस्तेमाल भारतीय क्रांतिकारियों के हक में बोलने वाले अखबारों पर किया जाता था. उस दौर में जो भी अखबार अंग्रेजी शासन के खिलाफ बोलते थे, उनके खिलाफ इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाती थी. इसके जरिए उनका मुंह बंद करवा दिया जाता था.


समय के साथ इसी कानून में बदलाव किए और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम-1904 अस्तित्व में आ गया. आगे कुछ और सालों बाद साल 1923 में इस कानून में कुछ और बदलाव किए गए और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम-1904 को नोटिफाई किया गया.



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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी दुबे के अनुसार, ज्योति के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम-1904 की धारा 3 और 5 के तहत पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. धारा 3 का इस्तेमाल उन लोगों के खिलाफ किया जाता है, जिन पर पूरी तरह से जासूसी का आरोप होता है. कोई भी व्यक्ति किसी भी वजह से अगर ऐसी किसी जगह पर जाता है, जहां पर जाना मना हो या फिर जहां जाने के कारण देश की सुरक्षा पर खतरा होता हो, तो इस कानून का इस्तेमाल किया जाता है.


इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति ऐसा कोई स्केच या मॉडल तैयार करता है, जो दुश्मन को किसी भी तरह का फायदा पहुंचाए, किसी सीक्रेट कोड या पासवर्ड को किसी दूसरे के साथ साझा किया जाए तो भी धारा 3 के तहत ही मामला दर्ज किया जाता है.


अधिवक्ता दुबे के अनुसार, आमतौर पर ऐसे मामलों में धारा-3 के तहत तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. हालांकि, अगर खुफिया जानकारी थल सेना, वायु सेना या जल सेना से जुड़ी हो अथवा किसी रक्षा सौदे या गोपनीयता से जुड़ी कोई जानकारी हो, तो दोष सिद्ध होने पर 14 साल तक की जेल हो सकती है. वहीं, अगर आरोपित का अपराध राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करे तो इस धारा के तहत आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है. इसके अलावा अगर इसी कानून की धारा-4 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है तो तीन साल की सजा या जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है.


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इसी तरह से आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा-5 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी गोपनीय कोड को किसी दुश्मन या किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करे, जिसके साथ वह कोड नहीं होना चाहिए, तो ऐसी स्थिति में इस कानून के तहत कार्रवाई होगी. इस स्थिति में यह जरूरी नहीं है कि जानकारी साधा करने का तरीका या वजह क्या है. भले ही लापरवाही से या फिर किसी उद्देश्य से किसी की ओर से अगर खुफिया जानकारी साझा की गई तो इसके तहत मुकदमा दर्ज किया ही जाएगा. इसके अलावा उस व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होगा, जिसे जानकारी दी गई हो.



इसके अलावा ज्योति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-152 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है. इस कानून में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अगर जान-बूझकर मौखिक, लिखित, संकेतों द्वारा, दृश्य चित्रण कर या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए या फिर वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर अलगाववादी गतिविधियों की भावना को बढ़ावा देता है अथवा देश की अखंडता को खतरे में डालने का काम करता है, तो दोष सिद्ध होने पर उस व्यक्ति को सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा.

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