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These four monasteries bind India in the thread of religion, knowledge, devotion and renunciation: Pt. Raghunandan

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शहर के प्राचीन श्रीनाथजी मंदिर प्रांगण में सनातन धर्म समिति व श्रीनाथ महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव में श्रद्धालु धर्म, ज्ञान और भक्ति के रस में सराबोर हो रहे हैं। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

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कथा के प्रारंभ में मोहित व नंदनी वरयानी ने सुबह पूजा-अर्चना का लाभ लिया। सनातन धर्म समिति के मुकेश श्रीमाल ने श्रीमद भागवत कथा के सहयोगियों का आभार प्रकट करते हुए बताया कि आचार्य राहुल दाधीच के मुख्य यजमान परिवार रमेश, मोहित,नंदनी, सह यजमान मदनलाल शर्मा परिवार, जयेश द्विवेदी परिवार, रायसिंह साबली, धीरज टेलर, जयराज कुंवर व श्रीनाथ महिला मंडल की जया कंसारा, लक्ष्मी सेवक, माया सुथार, ममता भट्ट व समस्त महिलाओं ने पोथी पूजन किया।

इस अवसर पर आचार्य राहुल दाधीच के सान्निध्य में मुख्य यजमान परिवार सहित मदनलाल शर्मा, जयेश द्विवेदी परिवार, रायसिंह साबली, धीरज टेलर, जयराज कुंवर व श्रीनाथ महिला मंडल की जया कंसारा, लक्ष्मी सेवक, माया सुथार, ममता भट्ट सहित महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पोथी पूजन किया। कथा व्यास से पंडित रघुनंदन महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा धर्म, कर्म और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिए भागवत कथा का वाचन और श्रवण आवश्यक है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में लोभ, लालच, छल-कपट और स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता।

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राधा और कृष्ण एक ही स्वरूप: पंडित रघुनंदन ने कहा कि भारत के चार प्रमुख मठ देश को एकता के सूत्र में बांधते हैं व धर्म, ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संदेश देते हैं। उन्होंने राधा-कृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राधा और कृष्ण एक ही स्वरूप हैं। इसलिए श्रद्धापूर्वक पहले राधा और फिर कृष्ण का नाम लिया जाता है।

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