Chikheang • The day before yesterday 08:56 • views 604
प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, मेरठ। भारतीय थलसेना की आत्मनिर्भरता को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडियन आर्मी की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) शाखा, लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
इस समझौते के तहत मेरठ छावनी स्थित 510 आर्मी बेस वर्कशॉप में पिनाका वेपन सिस्टम के ओवरहाल एवं अपग्रेडेशन पर कार्य किया जाएगा। यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेगी।
सेना के मध्य कमान की ओर से मंगलवार को यह जानकारी इंटरनेट मीडिया पर साझा की गई। इस एमओयू के तहत पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर सिस्टम के पुराने संस्करणों का उन्नयन, रखरखाव और तकनीकी सुधार भारतीय संसाधनों और विशेषज्ञता के माध्यम से किया जाएगा।
इससे न केवल हथियार प्रणाली की त्वरित परिचालन तत्परता सुनिश्चित होगी, बल्कि आधुनिक तकनीकों का समावेश और उपकरणों की तकनीकी अप्रचलन (आब्सोलेसेंस) की समस्या का प्रभावी समाधान भी संभव हो सकेगा।
इस उन्नयन कार्यक्रम का नेतृत्व कोर ऑफ ईएमई के अनुभवी सैन्य तकनीकी कर्मी कर रहे हैं, जिन्हें एलएंडटी और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के उद्योग विशेषज्ञों का सहयोग मिलेगा। यह मॉडल सेना और स्वदेशी उद्योग के बीच व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में देशभर की आर्मी बेस वर्कशॉप्स में पुराने रॉकेट सिस्टम्स के आधुनिकीकरण के लिए एक मानक (टेम्पलेट) के रूप में अपनाया जा सकता है।
एमओयू का महत्व इस तथ्य से भी बढ़ जाता है कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, लागत में कमी आएगी और देश के भीतर ही उच्चस्तरीय रक्षा तकनीक विकसित करने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे सेना को युद्धक तैयारियों में तेजी, बेहतर लाजिस्टिक सपोर्ट और दीर्घकालिक टिकाऊ समाधान प्राप्त होंगे।
कुल मिलाकर, पिनाका वेपन सिस्टम के उन्नयन के लिए यह समझौता भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, नवाचार और सार्वजनिक–निजी भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण है, जो आने वाले समय में भारतीय थलसेना की मारक क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। |
|