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Bahraich Violence : दस बिंदुओं में समझिए बहराइच के रामगोपाल हत्याकांड और हिंसा के कारण

Chikheang 2025-12-12 05:06:05 views 1247
  

न्यायालय परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद पुलिस कर्मी : जागरण



जागरण संवाददाता, बहराइचः भारत काे नेपाल से जाेड़ने वाले जिले बहराइच के महसी में बीते वर्ष 13 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन जुलूस पर मुस्लिम युवकों ने पथराव किया था। श्रद्धालुओं के विरोध पर फायरिंग भी की गई थी।  

इसमें रामगांव इलाके के रेहुआ मंसूर गांव निवासी 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्र की मौत हो गई थी। इसके बाद बवाल बढ़ गया। सात दिनों तक महसी महाराजगंज सुलगता रहा। दो करोड़ से अधिक की संपत्ति उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दी थी। जिले में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था। मामले में 11 मुकदमे दर्ज किए गए थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
दस बिंदुओं में जानते हैं हिंसा और हत्या के कारण

1 - बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर महराजगंज बाजार में 13 अक्टूबर 2024 को शाम छह बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान महराजगंज कस्बे में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने डीजे बंद करने को कहा। इस बात पर विवाद हो गया।

2 - जुलूस पर पत्थर फेंके गए। दोनों पक्षों में पथराव-आगजनी के साथ कई राउंड फायरिंग हुई। इसी दौरान रेहुआ मंसूर निवासी रामगोपाल मिश्र, अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़ गया और वहां लगा झंडा उतार दिया। उसकी जगह पर उसने भगवा झंडा फराया।

3 - इस दौरान अब्दुल हमीद और उनके बेटे सरफराज और दूसरे आरोपियों ने रामगोपाल को घर के अंदर खींचकर बुरी तरह से पीटा। फिर गोली मार दी। रामगोपाल को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

4 - परिवारजन ने शव को अस्पताल चौराहे पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान भीड़ और उग्र हो गई। मौके पर पहुंची तत्कालीन डीएम मोनिका रानी, एसपी वृंदा शुक्ल व सिटी मजिस्ट्रेट शालिनी प्रभाकर ने लोगों को समझाने का प्रयास किया।

5 - ढाई घंटे प्रदर्शन के बाद बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने हल्के बल का प्रयोग किया। कुछ देर के लिए मामला शांत हुआ। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने चौराहे पर कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया।

6 - रामगोपाल की मौत की खबर मिलते ही महाराजगंज कस्बे में मूर्ति विसर्जन जुलूस को रोक दिया गया। रातभर प्रदर्शन चला। कई थानों की फोर्स बुलाई गई। इसके बावजूद अगले दिन हिंसा और भड़क गई।

7 - अगले दिन सुबह हिंसा में मारे गए युवक का शव लेकर भीड़ निकली तो पुलिस ने रास्ते में रोका। पुलिस ने समझाया तो परिवार के लोग शव लेकर घर चले, लेकिन भीड़ आक्रोशित हो गई और महसी तहसील के मुख्य बाजार में आगजनी की। इस दौरान लोगों ने बाइक शोरूम, निजी अस्पताल में आग लगा दी।

8 - मौके पर पांच थानों की पुलिस फोर्स, दो बटालियन पीएसी की तैनाती की गई। इस दौरान भारी भीड़ मौके पर जुट गई। लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया।

9 - लखनऊ से एसटीएफ चीफ और एडीजी ला एंड आर्डर अमिताभ यश भी बहराइच पहुंचे। उन्होंने आगजनी कर रही भीड़ को पहले रोका, नहीं मानी तो हाथ में पिस्टल लेकर दौड़ा लिया। कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और हिंसा फैलाने वाले मुख्य आरोपी की तलाश शुरू की गई। मामले के मुख्य आरोपित रिंकू उर्फ सरफराज व तालिब को तत्कालीन एसओजी प्रभारी दिवाकर तिवारी, तत्कालीन हरदी एसओ कमल शंकर चतुर्वेदी व बौंडी एसओ रहे सूरज कुमार ने कोतवाली नानपारा के हांडा बसेहरी के पा मुठभेड़ के बाद पकड़ा था।

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10 - पुलिस ने हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर एनएसए की धारा भी बढ़ाई गई थी। जबकि कुछ की पहचान सीसी कैमरे की फुटेज और स्थानीय गवाहों के आधार पर की गई।

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