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देवभूमि की संस्कृति और विभूतियों से परिचित कराएगा स्कूली पाठ्यक्रम, नवाचार के समावेश पर विशेषज्ञों ने रखी राय

deltin33 2025-12-14 13:37:11 views 793
  

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला में हुआ मंथन



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड का स्कूली पाठ्यक्रम स्थानीय स्तर पर संस्कृति और विभूतियों से भी विद्यार्थियों को परिचित कराएगा। देहरादून स्थित डायट में आयोजित प्रधानाध्यापकों व प्रधानाचार्यों की कार्यशाला में राज्य के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत स्थानीय विषयों को समाहित करने के शिक्षा विभाग के अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का निश्चय किया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में शिक्षा के ज्ञान में विज्ञान और नवाचार का समावेश भी जरूरी है। माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों और प्रधानाचार्यों के लिए राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा –2025 एवं जेंडर संवेदीकरण पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

प्राचार्य डायट हेमलता गौड़ उनियाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। बुनियादी और विद्यालयी शिक्षा के लिए राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखाएं तैयार की जा चुकी हैं, जिन्हें विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना संस्था प्रमुखों की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञ शिक्षिका सरिता रावत ने जेंडर संवेदीकरण पर गतिविधियां कराईं।

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शिक्षाविद प्रदीप कुमार रावत ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण संरक्षण और मूल्य आधारित शिक्षा को पाठ्यचर्या का आधार बताया। वरिष्ठ प्रवक्ता राम सिंह चौहान व डा. विजय सिंह रावत ने भारतीय शिक्षा ज्ञान प्रणाली की विकास यात्रा और एनईपी-2020 की संरचना पर प्रकाश डाला।

पूर्व प्राचार्य राकेश जुगरान ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय गुणों से युक्त नागरिकों का निर्माण शिक्षा का मूल उद्देश्य है। एससीईआरटी के रविदर्शन तोपवाल व मनोज किशोर बहुगुणा ने पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और विद्यालयी प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया।
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