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Bihar Chunav: माइक छिनते ही थम गई थी सभा, दारौंदा में लालू यादव पर गिरी आचार संहिता की गाज

cy520520 2025-10-6 22:42:58 views 987
  दारौंदा में लालू पर गिरी आचार संहिता की गाज। (जागरण)





संंवाद सूत्र, दारौंदा (सिवान)। दारौंदा विधानसभा की विधायक जगमातो देवी के निधन के बाद दारौंदा विधानसभा उपचुनाव का 28 अक्टूबर 2011 को पांडेयपुर में स्थित सिन्हा खेल मैदान उस अनोखे नजारे का गवाह बना जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की चुनावी सभा अचानक प्रशासनिक हस्तक्षेप से थम गई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

चुनाव आयोग की तय समय-सीमा (शाम पांच बजे) बीत जाने के बाद भी सभा जारी थी। तभी मौके पर पहुंचे तत्कालीन सीओ शंकर चौधरी और तत्कालीन थानाध्यक्ष अमरकांत झा सीधे मंच पर चढ़ गए।



सभी की नजरों के सामने उन्होंने लालू प्रसाद का माइक छीन लिया। कुछ पल के लिए मैदान में सन्नाटा पसर गया। समर्थकों के बीच खलबली मच गई, लेकिन प्रशासन अपने कदम से पीछे हटाने को तैयार नहीं था। अधिकारियों ने साफ कहा- आचार संहिता से बड़ा कोई नहीं।

यह घटना चुनावी पारे को और गरमा गई। राजद खेमे ने इसे प्रशासनिक दबाव बताया, जबकि प्रतिद्वंद्वी दलों ने इसे कानून का राज करार दिया।

दारौंदा की जनता के लिए यह उपचुनाव केवल वोट की जंग नहीं, बल्कि अनुशासन बनाम अंदाज की टक्कर बनकर सामने आया। इसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गई, यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आया।


घटना की टाइमलाइन

  • शाम 4.30 बजे : लालू प्रसाद यादव का संबोधन शुरू
  • शाम 5.00 बजे : चुनाव आयोग द्वारा तय समय-सीमा समाप्त
  • शाम 5.10 बजे : सभा जारी रहने पर प्रशासन हरकत में आया
  • शाम 5.15 बजे : सीओ शंकर चौधरी व थानाध्यक्ष अमरकांत झा मंच पर पहुंचे
  • शाम 5.16 बजे : अधिकारियों ने लालू प्रसाद का माइक छीनी
  • शाम 5.20 बजे : सभा अचानक रुक गई, मची अफरातफरी
  • रात 7.00 बजे : पूरी घटना की रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गईं थी।

आचार संहिता उल्लंघन मामले में न्यायालय ने कुर्की की प्रक्रिया का दिया था आदेश

राजद सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध आचार संहिता उल्लंघन मामले में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सिवान सह विशेष अदालत एमपी, एमएलए अरविंद कुमार सिंह की अदालत ने कुर्की की प्रक्रिया जारी करने का आदेश पारित किया था।



अदालत ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में लगातार अनुपस्थित चल रहे लालू प्रसाद पर कुर्की की प्रक्रिया त्वरित रूप से पालित कराए जाने का भी आदेश पारित किया था।

बताया जाता है कि 2011 के विधानसभा चुनाव हेतु 109 दारौंदा विधानसभा क्षेत्र के लिए राजद के प्रत्याशी परमेश्वर सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करने हेतु तत्कालीन रेल मंत्री एवं राजद नेता लालू प्रसाद यादव आठ अक्टूबर 2011 को दारौंदा पहुंचे थे।



यहां जनसभा को संबोधित करना था लेकिन इसके पूर्व ही उपरोक्त स्थल पर 12 सितंबर 2011 से ही निषेधाज्ञा और बिना अनुमति के चुनाव प्रचार तथा ध्वनिक विस्तारक यंत्र का प्रयोग वर्जित था।

बावजूद इसके राजद नेता ने ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग करते हुए संध्या पांच बजे चुनाव प्रचार किया और भाषण दिया। इसी बीच तत्कालीन अंचलाधिकारी सह चुनाव प्रबंध उड़न दस्ता दल के प्रभारी शंकर महतो ने औचक निरीक्षण किया और यह पाया कि दोनों के द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है।



उन्होंने तुरंत परमेश्वर सिंह तथा लालू प्रसाद को अभियुक्त बनाते हुए दारौंदा थाना में कांड संख्या 146 /11 दर्ज कराई। इस मामले में सुनवाई हुई तथा दोनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए अदालत ने भादवि की धारा 188 के अंतर्गत संज्ञान भी लिया।

तदोपरांत दोनों उपायुक्तों पर नोटिस प्रक्रिया की गई। इस बीच पूर्व प्रत्याशी परमेश्वर सिंह का निधन हो गया और एकमात्र अभियुक्त लालू प्रसाद यादव पर ही मुकदमा चलता रहा।



लालू प्रसाद यादव के कोर्ट में अनुपस्थिति को लेकर दो बार गैर जमानती वारंट का आदेश भी जारी हुआ और इसे पुलिस कप्तान के माध्यम से पालित कराने का आदेश भी मामले में हुआ है।

इसी मामले में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर तत्कालीन थाना प्रभारी पर कारण बताओ नोटिस भी निर्गत की गई, किंतु किसी भी आदेश का पालन मामले में नहीं किया गया। अदालत द्वारा संबंधित प्राधिकारी को कई बार रिमाइंडर भी प्रेषित किया गया है।



सुनवाई की निश्चित तिथि तथा मामले में निर्देश का अनुपालन नहीं होने पर बाध्य होकर न्यायालय ने मामले के शेष एकमात्र अभियुक्त लालू प्रसाद यादव पर कुर्की की प्रक्रिया जारी करने और संबंधित प्राधिकारी द्वारा आदेश पालित किए जाने का भी आदेश पारित कर दिया।

इस मामले में पुन: सुनवाई हेतु 30 मई 2025 की तिथि निश्चित की गई। वहीं, न्यायालय ने 30 मई को आदेश सुरक्षित रख लिया।

ज्ञात रहे कि कुर्की के प्रक्रिया के अंतर्गत अभियुक्त की संपत्ति कुर्क करने के पूर्व इश्तेहार चिपकाए जाते हैं तथा इश्तेहार में जारी आदेश का निश्चित समय अवधि के अंदर अनुपालन नहीं किए जाने पर उक्त संपत्ति को न्यायालय कुर्क करने का आदेश पारित करता है।
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