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सारण में शिक्षा विभाग की नई पहल से सुधरेगी सरकारी स्कूलों की हालत, हाईटेक होगी पढ़ाई

cy520520 2025-10-7 23:36:46 views 1271
  सारण में संवरेगी सरकारी स्कूलों की सूरत





जागरण संवाददाता, छपरा। सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार लाने और उन्हें प्राइवेट स्कूलों के समकक्ष खड़ा करने के लिए शिक्षा विभाग ने ट्वीनिंग आफ स्कूल कार्यक्रम की शुरुआत की है।

सारण जिले में इस योजना के तहत प्रारंभिक विद्यालयों के बच्चों को नजदीकी मध्य या माध्यमिक विद्यालयों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे वहां की शैक्षणिक और सह-पाठ्य गतिविधियों से सीख लेकर अपने विद्यालय में सुधार कर सकें।




छात्र सीखेंगे दूसरी स्कूलों की बेस्ट प्रैक्टिस

कार्यक्रम के तहत कक्षा आठ के विद्यार्थियों और दो शिक्षकों का एक समूह बनाया जाएगा। यह समूह एक दिन के लिए चयनित विद्यालय का भ्रमण करेगा।

विद्यालय समयानुसार चार घंटे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में बच्चों को स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, अनुशासन और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं का अवलोकन कराया जाएगा।



भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों और छात्रों से बातचीत का अवसर मिलेगा, ताकि वे बेस्ट प्रैक्टिस को समझ सकें और अपने स्कूल में उसे लागू करने के लिए प्रेरित हों।


खेल-कूद और स्वास्थ्य पर भी रहेगा जोर

शारीरिक शिक्षा शिक्षक बच्चों को चूहा-बिल्ली, खो-खो, कबड्डी और लीडर ढूंढो जैसे पारंपरिक खेलों के माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। उन्हें शरीर की सफाई, पौष्टिक भोजन के महत्व और फास्टफूड से बचाव के बारे में भी बताया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें



यह पहल न केवल शिक्षण गुणवत्ता में सुधार लाएगी, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और टीम भावना को भी मजबूत करेगी।


विद्यालयों में होगा अल्पाहार व पेयजल की व्यवस्था

ट्वीनिंग कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्तर पर अल्पाहार और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक राशि विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाएगी।



इस कार्यक्रम के प्रभावी संचालन को लेकर हाल ही में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) प्रियंका रानी ने प्रधानाध्यापकों के साथ एक ऑनलाइन बैठक भी की, जिसमें सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।


अनुभव साझा करेंगे बच्चे

ट्वीनिंग से लौटने के बाद छात्र-छात्राएं अपने अनुभवों को डायरी में लिखेंगे और चेतना सत्र के दौरान विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा करेंगे। इससे बच्चों में सीखने की ललक और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ेगी।



प्रधानाध्यापकों का कहना है कि यह पहल सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनमें सीखने की रुचि जागृत होगी और सरकारी विद्यालयों की साख में भी इजाफा होगा।
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