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ऑनलाइन शॉपिंग पर ‘डार्क पैटर्न्स’ का साया! इन 5 तरीके से चोरी-चोरी ग्राहकों के साथ हो रहा बड़ा धोखा, खरीदारी पर असर संभव

cy520520 2025-10-8 03:36:41 views 1290
  भारत के लगभग सभी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स को अनजाने में डार्क पैटर्न्स के जाल में फंसा रहे हैं।





नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करना हर किसी के डेली लाइफ का हिस्सा बन चुकी है। बस एक क्लिक में ऑफर, कैशबैक और फ्री डिलीवरी जैसी चीजों की भरभारत हो जाती है। लेकिन क्या ये सब सच में फ्री होता है? LocalCircles की ताजा रिपोर्ट ने इस चमक-दमक के पीछे का क्या खेल चल रहा है, सबकी परतें खोल दी है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

भारत के लगभग सभी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स को अनजाने में डार्क पैटर्न्स के जाल में फंसा रहे हैं। फ्लिपकार्ट, Amazon, Tata Neu, Jiomart और Myntra जैसे दिग्गजों पर उंगलियां उठी हैं, जबकि Meesho इस दौड़ में “ईमानदार खिलाड़ी” बनकर उभरा है।



अब जब सरकार खुद छिपे हुए कैश ऑन डिलीवरी चार्ज की जांच में जुट गई है, तो त्योहारी खरीदारी के इस मौसम में ई-कॉमर्स की चमक पर सवाल उठने लगे हैं। क्या हमारी पसंद सच में हमारी अपनी है या किसी चालाकी का शिकार है।

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। LocalCircles नाम की संस्था ने 334 जिलों से आए 77,000 लोगों के जवाबों के आधार पर एक ऑडिट किया, जिसमें पाया गया कि देश के 97% बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स किसी न किसी तरह के “डार्क पैटर्न“ का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी ऐसे डिजाइन या फीचर्स जो यूजर्स को गुमराह करने या उनसे ज्यादा पैसे वसूलने के लिए बनाए गए हैं।


क्या हैं डार्क पैटर्न्स?

डार्क पैटर्न्स वो डिजाइन ट्रिक्स होती हैं जो उपभोक्ताओं को अनजाने में ऐसा कुछ करने पर मजबूर करती हैं जो वे शायद करना नहीं चाहते हैं। जैसे इनमें एक्स्ट्रा चार्ज भरना, गैरजरूरी सेवाएं लेना या अपनी निजी जानकारी शेयर करना शामिल है।

LocalCircles की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म्स पर 10 तरह के डार्क पैटर्न्स पाए गए, जिनमें से 5 सबसे आम हैं।



1. असली कीमत आखिर स्टेप में बताना (जैसे हैंडलिंग या प्लेटफॉर्म फीस)।

2. पहले सस्ता ऑफर दिखाना, फिर लॉगिन के बाद कीमत बदल देना।

3. यूजर की जानकारी लेकर उसे मार्केटिंग या अपसेलिंग के लिए इस्तेमाल करना।

4. यूजर को कोई अतिरिक्त कदम उठाने पर मजबूर करना (जैसे अनचाहा सब्सक्रिप्शन)।

5. यूजर की कार्ट में अपने आप कोई प्रोडक्ट या सर्विस जोड़ देना।
सरकार कर रही जांच

केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पुष्टि की है कि सरकार अब इन प्लेटफॉर्म्स की कैश ऑन डिलीवरी (COD) चार्जेज पर जांच शुरू कर रही है। कई प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतें थीं कि वे डिलीवरी के समय छिपे हुए चार्ज लेते हैं।



सरकार अब यह देखेगी कि क्या ये चार्ज पहले से साफ़ बताए गए थे और खरीदारी के किस स्टेज पर दिखाए गए। अगर किसी प्लेटफॉर्म ने नियम तोड़े हैं तो जुर्माना, डिजाइन में बदलाव, और सख्त पारदर्शिता नियम लागू किए जा सकते हैं।
त्योहारी सीजन पर असर

जांच ऐसे समय पर हो रही है जब अक्टूबर-नवंबर के त्योहारों की खरीदारी का सीजन चल रहा है। लाखों लोग इस दौरान ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, इसलिए सरकार की सख्ती से प्लेटफॉर्म्स की सेल और यूज़र ट्रस्ट दोनों पर असर पड़ सकता है।



मंत्रालय ने पहले ही सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने ऐप्स का डार्क पैटर्न फ्री ऑडिट कराने का निर्देश दिया था। अब एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) इन नियमों की निगरानी करेगा और उपभोक्ता संगठनों के साथ मिलकर सुधारों की सिफारिश करेगा।

LocalCircles अब जल्द ही ट्रैवल, फिनटेक और फूड डिलीवरी ऐप्स की भी इसी तरह जांच करने जा रहा है।

यह भी पढ़ें: कैश ऑन डिलीवरी पर ज्यादा चार्ज! सरकार ने बैठाई तगड़ी जांच, फ्लिपकार्ट जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म की अब खैर नहीं
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