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Makar Sankranti 2026: किस्मत बदलने वाली है यह संक्रांति! सूर्य और पितृ दोष दूर करने के लिए बस करें ये छोटे से काम

deltin33 2026-1-1 22:13:10 views 577
  

मकर संक्रांति पर करें ये उपाय (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि \“मकर\“ में प्रवेश करते हैं। साल 2026 की मकर संक्रांति न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सूर्य दोष और पितृ दोष को शांत करने का एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ अवसर भी है। इस दिन किए गए स्नान, दान और तर्पण से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
1. शुभ मुहूर्त और समय (Date & Timing)

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति का विवरण इस प्रकार है:

तारीख: 14 जनवरी 2026

सूर्य का प्रवेश: दोपहर 03:13 बजे (धनु से मकर राशि में)

स्नान-दान का शुभ समय: दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक।
2. सूर्य दोष शांति के उपाय

जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है या मान-सम्मान में कमी महसूस होती है, उन्हें निम्न उपाय करने चाहिए:

तांबे के लोटे से अर्घ्य: सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्य को जल दें।

विशेष मिश्रण: जल में गुड़ और लाल चंदन मिलाना अनिवार्य है, क्योंकि यह सूर्य देव को प्रिय है।

मंत्र शक्ति: जल देते समय “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः“ का जाप करें। इससे आत्मविश्वास और सेहत में सुधार होता है।
3. पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितरों की नाराजगी घर में कलह और आर्थिक तंगी लाती है। इसे शांत करने के लिए संक्रांति पर ये कार्य करें:

तिल का अर्घ्य: सूर्य को जल देते समय उसमें काले तिल और लाल फूल डालें। यह सीधे पितरों को तृप्त करता है।

तर्पण और मंत्र: “ॐ पितृदेवाय नमः“ मंत्र का जाप करते हुए पितरों का ध्यान करें।

  

(Image Source: AI-Generated)

परोपकार: इस दिन गाय, कुत्ते और कौवों को भोजन खिलाना चाहिए। माना जाता है कि पितर इन रूपों में आकर अपना भाग ग्रहण करते हैं।

शाम का दीपदान: शाम को घर के दक्षिण कोने में एक दीपक पितरों के नाम से जरूर जलाएं।
4. दान और परंपरा

मकर संक्रांति पर \“खिचड़ी\“ के दान और सेवन का विशेष महत्व है। इस दिन तिल, गुड़, चावल और गर्म कपड़ों का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, उत्तर भारत में पतंग उड़ाने की परंपरा मनोरंजन के साथ-साथ सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ लेने का भी एक तरीका है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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