उत्तर पूर्व दिशा में उल्का वर्षा दिखाने का स्थान। सौ.जवाहर तारा मंडल
अमलेन्दु त्रिपाठी, प्रयागराज। इस सप्ताह खगोलीय घटनाएं हमें आकर्षित करेंगी। दिन में पेरीहेलियन और रात में दिखने वाला सुपर वुल्फ मून खास है। तीन जनवरी को पूर्णिमा है। सुपरमून आमतौर पर तब होता है जब चंद्रमा की पूर्ण अवस्था पृथ्वी के निकट आने के साथ मेल खाती है, जिसे पेरिगी कहा जाता है।
खगोलीय भाषा में इसे सुपर वुल्फ मून भी कहते हैं। आधी रात के आसपास सिर के ऊपर यह चमकेगा। इसके पास ही एक चमकीला तारा नजर आएगा। वह बृहस्पति होगा। इस दिन नजर आने वाला चंद्रमा पेरिगी पर है, अर्थात चंद्रमा की कक्षा में वह बिंदु जो पृथ्वी के सबसे करीब होता है।
यही वजह है कि इसे पेरिगीयन पूर्णिमा कहते हैं। सुपरमून में चंद्रमा आठ प्रतिशत अधिक बड़ा और 16 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देगा। सुपर वुल्फ मून की संज्ञा देने की वजह है कि कड़ाके की ठंड के दौरान पहले के दिनों में उत्तरी गोलार्ध में भेड़ियों के झुंड की आवाज अधिक सुनाई देती थी, इसके चलते पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया।
इसी समय सूर्य भी पृथ्वी के करीब है। इस घटना को पेरीहेलियन अर्थात उपसौर कहते हैं। सामान्य दिनों में सूर्य पृथ्वी से लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर दूर होता है। पेरीहेलियन के शाब्दिक अर्थ को समझें तो यह ग्रीक शब्द पेरी और हेलिओस से बना है। पेरी का अर्थ करीब होता है जबकि हेलिओस का अर्थ सूरज से लिया जाता है।
जवाहर तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा कहती हैं कि उपसौर के समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तेज गति से घूमती है, जो लगभग 30.27 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। इसके विपरीत, जब पृथ्वी सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर होती है, तो उस स्थिति को उपसौर अर्थात एपहेलेन कहते हैं। यह स्थिति 2026 में छह जुलाई को होगी।
सूर्य धनु राशि में बुध व शुक्र कुंभ राशि में
जवाहर तारामंडल ने इस माह के आसमान का मानचित्र जारी किया है। उसके अनुसार मीन, मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क और सिंह राशियां आसमान में देखी जा सकती हैं। मृग, बृहल्लुब्धक, सारथी और महाश्व तारामंडल भी नजर आ रहे हैं। कृत्तिका, रोहणी, बहह्महृदय, पुनर्वसु, मघा, काक्षी, राजन्य, व्याध, प्रश्वा और अगस्त्य जैसे चमकीले तारे भी दिखाई दे रहे हैं।
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सूर्य धनु राशि में है, जो माह के मध्य में मकर राशि में प्रवेश करेगा। बुध व शुक्र कुंभ राशि में है। 15 जनवरी के बाद इसे सूर्योदय से ठीक पहले पूर्व दिशा में देख सकेंगे। मंगल मकर राशि में है, इसे भी पूर्व दिशा में देखा जा सकता है। बृहस्पति, मिथुन राशि और शनि मीन राशि में है। इन सब के साथ 19 जनवरी को चंद्रमा शुक्र, 23 को शनि, 31 को बृहस्पति के निकट दिखाई देगा।
आसमान में नजर आएगा क्वाड्रेंटिड्स उल्का बौछार
इस महीने क्वाड्रेंटिड्स उल्का बौछार भी देख सकते हैं। इसके लिए सबसे अच्छा समय चार जनवरी की आधी रात है। भोर से ठीक पहले इसे सबसे अच्छे तरीके से देख सकेंगे। उल्का बौछार आधी रात से ही शुरू हो जाएगी। तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा के अनुसार पूर्णिमा की रोशनी होने के कारण क्वाड्रेंटिड उल्काओं को देखने में कुछ बाधा हो सकती है। बादल होने पर भी कठिनाई होगी। क्वाड्रेंटिड रेडिएंट आकाश के उत्तर दिशा में नजर आएगा। क्वाड्रेंटिड्स हर घंटे 100 से अधिक उल्का पैदा कर सकते हैं। इन्हें फायरबाल भी कहा जाता है। यह उल्का बौछार पूरे महीने होती रहती है। |