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हापुड़ जिला जेल निर्माण में 4 करोड़ की धोखाधड़ी, सप्लायर-कर्मचारियों पर गंभीर आरोप; CCTV फुटेज गायब

deltin33 2 hour(s) ago views 174
  

जिला जेल का निरीक्षण करने पहुंचे थे मेरठ रेंज डीआईजी कलानिधि नैथानी।  



केशव त्यागी, हापुड़। जिले में जिला कारागार के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। निर्माण कंपनी वैगमाइन इंटरप्राइजेज के पार्टनर संदीप झावर ने पुलिस को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और कंपनी के ही कुछ कर्मचारियों ने मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।

मामले में शिकायत पर आरोपितों ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के सामने आने से निर्माण क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक नई परत भी उजागर हुई है।

पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में बरेली के प्रेमनगर के संदीप झावर ने बताया कि उन्होंने वैगमाइन इंटरप्राइजेज ने मैसर्स आरपीपी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से सब-कान्ट्रैक्ट लेकर हापुड़ जिला कारागार का निर्माण कार्य संभाला हुआ है। अभिलेखों की जांच के दौरान साइट पर धोखाधड़ी का पता चला।
कागजों में मिली गड़बड़ी

तीन नवंबर 2025 को सुबह करीब आठ बजे वह अपने पार्टनर पंकज गोयल के साथ बरेली से हापुड़ साइट पर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने आने वाले मटेरियल की जांच की और कागजातों में गड़बड़ी पाई। साइट पर रेत, बजरी और गिट्टी की गाड़ियां कम आ रही थीं, लेकिन कागजों में फर्जी एंट्री और फर्जी कटे पर्चे बनाकर ज्यादा दिखाया जा रहा था।

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सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर साफ हुआ कि सप्लायर मैसर्स सनप्रीत सिंह के मालिक सनप्रीत सिंह), मैसर्स हरमिंदर सिंह कान्ट्रैक्टर के मालिक हरमिंदर सिंह), मैसर्स एमबी इंटरप्राइजेज की मालिक बबीता लौर और ट्रांसपोर्टर डीके तेवतिया की मिलीभगत से यह धोखाधड़ी हो रही थी। कंपनी के कर्मचारी अंकित सिंह, राजा, लोपेंद्र, राम सिंह, अभिषेक, ऋषि, गार्ड रामवीर और अमर सिंह भी इसमें शामिल थे।
गायब मिला सीसीटीवी का DVR

13 सितंबर 2025 से 15 सितंबर 2025 तक की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, जो इस धोखाधड़ी के सबूत के रूप में पेश की गई है। झावर ने तीन नवंबर 2025 को प्रोजेक्ट मैनेजर रघुनाथ और डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर दिनेश को हिदायत दी कि 20 सितंबर 2025 से आगे की फुटेज चेक की जाएगी। लेकिन अगले दिन चार नवंबर 2025 को सुबह आठ बजे जब स्टाफ साइट पर पहुंचा, तो सीसीटीवी का डीवीआर गायब मिला।

डीवीआर वाले कमरे की चाबी अकाउंटेंट राजा के पास रहती थी, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। ट्रांसपोर्टर डीके तेवतिया के ट्रकों से ही सारा मटेरियल आता था, लेकिन कम माल उतारकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। जब झावर ने सप्लायर और कर्मचारियों से हिसाब मांगा, तो उन्हें गाली-गलौज दी गई और जान से मारने की धमकियां मिलीं।

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यह एक बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें कंपनी के अन्य कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। इनकी जांच जरूरी है ताकि सभी अपराधी सामने आएं और सजा मिले। एसपी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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