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वेनेजुएला पर हमले के पीछे क्या? ड्रग्स तस्करी, तेल भंडार या वामपंथी शासन

deltin33 6 day(s) ago views 858
  

वेनेजुएला पर हमले के पीछे क्या? ड्रग्स तस्करी, तेल भंडार या वामपंथी शासन (फोटो- रॉयटर)



जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिका के निशाने पर रहा है। कभी अमेरिका में ड्रग्स तस्करी को लेकर, तो कभी वामपंथी तानाशाही शासन को लेकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर थे। कई महीनों से अमेरिका वेनेजुएला की घेरेबंदी कर रहा था। ट्रंप चाह रहे थे कि मादुरो खुद ही देश छोड़कर चले जाएं।
ट्रंप ने कहा था, सत्ता छोड़कर विदेश चले जाएं मादुरो

उन्होंने ये भी कहा था कि मादुरो अगर खुद सत्ता छोड़ देते हैं तो उनको स्मार्ट माना जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने मादुरो पर अमेरिका में हजारों वेनेजुएलाई प्रवासियों के पहुंचने का भी आरोप लगाया है। माना जाता है कि 2013 के बाद से आर्थिक संकट और दमनकारी नीतियों के चलते 80 लाख नागरिक पलायन करके अमेरिका पहुंचे हैं।

वर्ष 2013 में ही मादुरो कम्युनिस्ट शासन के तहत सत्ता में आए थे।ट्रंप ने मादुरो पर अमेरिका में खासतौर पर फेंटेनिल और कोकीन जैस नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ने का भी आरोप लगाया है।

वेनेजुएला के दो आपराधिक संगठनों, ट्रेन डी आरागुआ और कार्टेल डी लास सोल्स को विदेशी आतंकवादी संगठन भी घोषित किया गया है। ट्रंप का आरोप लगाया है कि दूसरा संगठन खुद मादुरो के नेतृत्व में चलता है।
मादुरो ने कहा था, ड्रग्स के बहाने विशाल तेल भंडार पर कब्जे की साजिश

हालांकि, मादुरो ने खुद को किसी कार्टेल का सरगना होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह “ड्रग्स के खिलाफ जंग\“\“ को बहाना बनाकर उन्हें सत्ता से हटाना और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है।

विश्लेषकों का कहना है कि \“कार्टेल डी लास सोल्स\“ कोई संगठित नहीं, बल्कि एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए किया जाता है, जिन्होंने कोकीन को वेनेजुएला के रास्ते आगे भेजने की अनुमति दी।
वेनेजुएला के आसपास था भारी सैन्य जमावड़ा

वेनेजुएला पर हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ा सैन्य जमावड़ा कर रखा है, जिसमें कैरिबियाई क्षेत्र में तैनात एक विमानवाहक पोत, युद्धपोत और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। यूनाइटेड स्टेट्स सदर्न कमांड के मुताबिक 15 हजार सैनिक दिसंबर से क्षेत्र में तैनात हैं।
ट्रंप ने पेंटागन के साथ एक गुप्त निर्देश पर हस्ताक्षर किए थे

अगस्त में ट्रंप ने पेंटागन के साथ एक गुप्त निर्देश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें वेनेजुएला के ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने की बात कही गई थी। ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल पर नाकेबंदी की मांग की थी, मादुरो सरकार पर प्रतिबंधों को और कड़ा किया तथा प्रशांत महासागर और कैरिबियाई सागर में कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल जहाजों पर 35 घातक हमले करवाए। इन हमलों में 100 से ज्यादा लोग मारे गए। अमेरिकी सैन्य जमावड़े में अमेरिकी सेना ने ट्रांसपोर्ट और कार्गो विमान भी लगा रखे थे।
ऑपरेशन में हजारों मरीन सैनिकों के रेडी रखा था

न्यूयॉर्क टाइम्स को मिले फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक भारी मालवाहक सी-17 विमानों का बड़े पैमाने पर सैनिकों और साजो-सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया। इन विमानों ने केवल एक हफ्ते में अमेरिकी सैन्य अड्डों से प्यूर्टो रिको तक 16 बार उड़ान भरी।

अक्टूबर से अमेरिकी सेना में एक नेवी एक्सपेडिशनरी स्ट्राइक ग्रुप शामिल है, जिसमें हजारों मरीन सैनिकों को ले जाने वाले एम्फीबियस युद्धपोत, साथ ही युद्धक विमान, अटैक हेलीकॉप्टर और दूसरे एयरक्राफ्ट शामिल हैं।

इस तैयारी के तहत नवंबर में एक पूरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी आया, जिसमें यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड और कई डिस्ट्रायर वेनेजुएला के तटों से लगभग 100 नाटिकल मील दूर मंडरा रहे थे।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो कभी बस ड्राइवर थे

23 नवंबर 1962 को जन्मे वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो श्रम संघ के नेता के बेटे हैं और कभी बस ड्राइवर के तौर पर अपना जीवन यापन करते थे। 1992 में तत्कालीन सैन्य अधिकारी ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में उन्होंने राजनीति में पदार्पण किया और शावेज के करीबी बन गए। 1998 में शावेज के नेतृत्व में उन्होंने चुनाव भी लड़ा।

शावेद के शासनकाल में मादुरो नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और विदेश मंत्री भी बने। विदेश मंत्री रहने के दौरान मादुरो ने वेनेजुएला के तेल कारोबार को पूरी दुनिया में फैलाया। शावेज ने अपने निधन से पहले मादुरो को अपना उत्तराधिकारी चुना और 2013 में शावेज के निधन के बाद मादुरो ने चुनाव जीता और वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने।
वेनेजुएला में महंगाई चरम पर

मादुरो के शासनकाल में देश भारी आर्थिक संकट में घिर गया और महंगाई चरम पर पहुंच गई। मादुरो के शासनकाल को चुनावों में धांधली, खाद्य संकट और अधिकारों के हनन के लिए जाना जाता है।

उन्होंने 2014 और 2017 में सरकार के खिलाफ आंदोलनों को बेरहमी से कुचला। जनवरी 2025 में हुए राष्ट्रीय चुनाव में वह तीसरी बार देश के राष्ट्रपति चुने गए। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और विपक्ष ने इन चुनावों को धोखाधड़ी बताया था। हजारों विरोधियों को जेल में डाल दिया गया था। विपक्षी नेता नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मालिया मचाडो ने भी मादुरो सरकार की दमनात्मक नीतियों को दुनिया के सामने रखा था।
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