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बदलेगी जीवनशैली, बढ़ेगा आत्मबल: स्वामी रामदेव बोले— स्वदेशी अपनाना हर नागरिक की जिम्मेदारी

Chikheang The day before yesterday 17:56 views 216
  



आजकल के मॉडर्न लाइफस्टाइल ने न सिर्फ हमारा खान-पान और जीना का तरीका बल्कि सेहत भी ख़राब कर दी है। हम अक्सर आसान चीज़ें ही पसंद करते हैं फिर चाहे वो फास्ट फूड खाना हो या छोटी परेशानी के लिए तुरंत दवाई खाना। समय के साथ ये छोटी छोटी आदतें विकराल रूप लेकर हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। पिछले कुछ समय से दुनियाभर में स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता बढ़ी है, ऐसे में अधिकतर लोग योग और आयुर्वेद की ओर रुख कर रहे हैं।

पतंजलि आयुर्वेद के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित Facebook Live कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने हर भारतीय को योग, आयुर्वेद, सनातन परंपरा, स्वदेशी जीवन और गौसेवा के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। अधिक जानकारी के लिए आप इस फेसबुक लाइव को देख सकते हैं
सनातन धर्म और शिक्षा: आधुनिक भारत की मजबूत जड़ें

सनातन धर्म और संस्कृति भारतीय जीवन का मूल आधार हैं। यह केवल धार्मिक गतिविधि नहीं है, बल्कि जीवन-चर्या, मानवीय मूल्यों और नैतिकता का समग्र स्वरूप है। स्वामी रामदेव के मुताबिक आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सनातन शिक्षा भी ज़रूरी है। जिस तरह विज्ञान और तकनीक विकसित हो रही है, उसी तरह हमारे मन और चरित्र का विकास भी जरूरी है।
योग और आयुर्वेद: स्वास्थ्य का वास्तविक आधार

पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक स्वामी रामदेव ने योग और आयुर्वेद को हमारी संस्कृति का उपहार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के लाइफस्टाइल में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में योग और आयुर्वेद न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि मन को शांत और आत्मा को मजबूत बनाते हैं। रोज़ाना योग और प्राणायाम करने से हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों बेहतर रहते हैं।
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता: हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे \“आत्मनिर्भर भारत\“ आंदोलन का पुरज़ोर समर्थन करते हुए स्वामी रामदेव ने स्वदेशी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना है कि केवल \“मेक इन इंडिया\“ कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें \“मेड इन इंडिया\“ को अपनाना और आत्मसात करना है। स्वदेशी कपड़े, खान-पान और स्वदेशी जीवनशैली, ये सभी हमारी संस्कृति और आत्मनिर्भरता का आधार हैं। अगर हम अपनी स्थानीय वस्तुओं और संसाधनों को बढ़ावा देंगे तो न केवल हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि हमारे देश की पहचान भी बढ़ेगी।
नया भारत, नया विश्वास

पतंजलि के 32वें स्थापना दिवस पर स्वामी रामदेव का संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायक था। उन्होंने बताया कि भारत तब ही श्रेष्ठ और विकसित होगा, जब हर नागरिक योग, आयुर्वेद, सनातन शिक्षा, स्वदेशी और सेवा की राह पर स्थिरता से आगे बढ़ेगा। उनका संदेश सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य मार्गदर्शन है- एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर, और वैश्विक दृष्टि वाला भारत बनाना।
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