जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। अपने अधिकार का गलत प्रयोग करते हुए निर्दोष व्यक्ति को झूठे केस में फंसाने से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने अगरेर थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। जिला जज चतुर्थ अनिल कुमार की अदालत ने एक जमानत याचिका के दौरान सुनवाई करते यह जारी किया है।
बताया जाता है कि आरोपी निरंजन कुमार के द्वारा दाखिल नियमित जमानत याचिका पर जिला जज चतुर्थ सुनवाई कर रहे थे। जिसमें किशोरी पासवान ने आरोपित पर अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ उसका मोबाइल छीनने का आरोप लगाया था।
अगरेर थानाध्यक्ष द्वारा इस मामले को डकैती बताते हुए बीएनएस की धारा 309 (6) लगाया गया था एवं तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। कोर्ट ने मामले की संदिग्धता को देखते हुए अगरेर थानाध्यक्ष को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया।
केस करने वाले ने कोर्ट को बताया कि आरोपित कोई हथियार नहीं लिए थे ना हीं उनका मोबाइल छीन पाए थे। कोर्ट ने पाया कि यह सिर्फ एक झड़प का मामला था जिसे थानाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर डकैती बनाया गया और अभियुक्त को गिरफ्तार कर पिछले दो माह से जेल में रहने के लिए मजबूर किया गया।
कोर्ट ने आरोपित को जमानत देते हुए अगरेर थानाध्यक्ष के खिलाफ डीजीपी, डीआईजी शाहाबाद एवं एसपी को एक निर्दोष व्यक्ति को जबरदस्ती झूठे केस में फंसाने एवं पुलिस की छवि को धूमिल करने के लिए विभागीय कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। |