जागरण संवाददाता, मेरठ। भले ही वन विभाग की टीम तेंदुए की तलाश में 24 घंटे गश्त कर रही हो, लेकिन लापरवाही बरती जा रही है। तेंदुए को जिन स्थानों पर तलाश करना चाहिए, वहां पर तलाश नहीं किया जा रहा है। घने जंगल में सर्च आपरेशन चलना चाहिए, लेकिन टीम के सदस्य सड़कों पर खड़े होकर तेंदुए की तलाश कर रहे हैं।
कभी इस सड़क पर तो कभी उस सड़क पर पैदल गश्त कर रहे हैं। जिस चिमनी के पास तेंदुआ होने की आशंका है, वहां पर उसे अभी तक एक बार भी नहीं देखा गया। हालांकि वन विभाग का कहना है कि वह अपने तरीके से तेंदुए की तलाश कर रहे हैं।
खुद को लेकर भी टीम सदस्य कर रहे लापरवाही
तेंदुए को पकड़ने के लिए बेहद सावधानी बरतनी होती है। टीम के पास हेलमेट होना चाहिए। हर सदस्य के पास वाकी-टाकी होना चाहिए। पैरों में बूट होने चाहिए। बेहोश करने वाली गन होनी चाहिए। इसके अलावा हाथों में दस्ताने होने चाहिए, लेकिन वन विभाग की टीम हाथ में एक डंडा लेकर तेंदुए को तलाश रही है। यदि तेंदुए ने टीम पर ही हमला कर दिया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
घना जंगल भी तेंदुआ पकड़ने में आ रहा आड़े
सिग्नल रेजिमेंट करीब 100 एकड़ में फैला है। जिसमें 70 प्रतिशत घना जंगल है। जहां पर अधिक झाड़ियां खड़ी है और पेड़ है। इनके अंदर नील गाय, मोर, हिरन जैसे वन्य जीव भी रहते हैं। इस जंगल के अंदर घुसकर सर्च आपरेशन किया जाए तो तेंदुए को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
घने जंगल के बीच में है बंद पड़ा भट्ठा
यहां काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि जब यहां कई साल पहले तेंदुआ आया था तो उसने बंद पड़े भट्ठे की चिमनी को अपना ठिकाना बनाया था। अब भी यहीं अनुमान है कि इसी चिमनी को तेंदुए ने ठिकाना बनाया होगा। चिमनी घने जंगल में होने के कारण टीम यहां तक नहीं पहुंच रही है। हालांकि मंगलवार को ड्रोन से दिखा, लेकिन ड्रोन कैमरा भी झाड़ियां होने के कारण कुछ नहीं दिखा रहा है। |
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