जेएस विश्वविद्यालय।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। जेएस विश्वविद्यालय की मान्यता रद होने से इस समय पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के साथ ही हजारों पूर्व छात्र-छात्राओं के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाने का निर्णय लिया है, लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा द्वारा अभिलेखाें के सत्यापन से उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।
कई पा चुके हैं सरकारी नौकरी, कुछ प्राइवेट कंपनियों में बड़े पदों पर
इस विश्वविद्यालय से पढ़ चुके कई छात्र-छात्राएं सरकारी नौकरी पा चुके हैं। वहीं कई प्राइवेट कंपनियों में काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में अलग-अलग पाठ़्यक्रमों में अभी हजारों छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पिछले वर्ष मार्च से शुरू हुई जयपुर पुलिस की कार्रवाई के बाद वे भविष्य को लेकर आशंकित थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हालात सामान्य बनाने के लिए कक्षाएं चलाने और नए प्रवेश लेने के प्रयास किए, लेकिन प्रशासन ने प्रवेश लेने से मना कर दिया।
डीएम ने भेजी थी रिपोर्ट
डीएम रमेश रंजन ने बताया कि जिले से जेएस विश्वविद्यालय के संबंध में पहले दो-तीन रिपोर्ट भेजी गईं थीं। 15-20 दिन पहले भी एक रिपोर्ट भेजी थी। इन सभी में मान्यता रद करने की संस्तुति की गई थी। इस पर हुई कार्रवाई के संबंध में शासन से कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है। इधर इस मामले में वर्तमान कुलाधिपति डा. गीता यादव से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
शिकोहाबाद पुलिस ने दर्ज की थीं दो प्राथमिकी, सीज किए थे खाते
प्रशासन की जांच के दौरान कुछ छात्रों ने डिग्री न देने, प्रताड़ित और मारपीट करने के आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी। इसके बाद शिकोहाबाद पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज कीं। एक में जेल में बंद कुलाधिपति को भी नामजद किया गया। वहीं विश्वविद्यालय के खाते भी सीज कर दिए थे।
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