लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर सेंटर
जागरण संवाददाता, मेरठ। स्पोर्ट्स सिटी के रूप में देश दुनिया में पहचान बनाने वाला मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेडिकल हब के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। रैपिड रेल कारिडोर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और अब गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण मेरठ की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बूस्टर डोज से कम नहीं है।
अच्छी कनेक्टिविटी दिल्ली के बड़े अस्पतालों की ब्रांच खोलने के राह प्रदान कर रही है तो सरकारी सुविधाओं में 100 बेड की क्रिटिकल केयर और इतने ही बेड का ट्रामा सेंटर के निर्माण से बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता एसजीपीजीआई जैसी सुविधाएं मांग रही हैं। ताकि मरीजों की दिल्ली तक की दौड़ खत्म हो सके।
क्रिटिकल केयर और ट्रामा सेंटर से सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवाएं
मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, हापुड़ सहित आसपास के अन्य जनपदों के गंभीर मरीजों और दुर्घटना के घायलों के लिए लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज ही बड़ा सेंटर है। लंबे समय से यहां के लोग क्रिटिकल केयर और ट्रामा लेवल-वन जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे थे। मुद्दतों के बाद ये सुविधाएं विकसित हो रही हैं। वर्ष 2026 में अक्टूबर तक 100 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर शुरू हो जाएगा।
चार मंजिला भवन लगभग तैयार हो चुका है। इसमें आधुनिक उपरकरण लगाए जाएंगे। दिल, सांस, गुर्दा और संक्रामक रोगों के गंभीर रोगियों को दिल्ली के अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। यहीं पर एक छत के नीचे उनका उपचार हो सकेगा। वर्तमान में गंभीर मरीजों को अलग-अलग विभागों जैसे मेडिसिन, सर्जरी के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन क्रिटिकल केयर सेंटर चालू होने से समय की बचत होगी।
गोल्डन आवर में मरीज पहुंचकर समुचित इलाज पा सकेगा। वेंटिलेटर युक्त बेड, डायलिसिस यूनिट और आइसोलेशन वार्ड की आधुनिक उपकरणों के साथ व्यवस्था होगी। संक्रामक रोगों के लिए विशेष वार्ड बनाए जा रहे हैं। ताकि कोविड-19 जैसी महामारी को देखते हुए मरीज को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सके। वहीं, क्रिटिकल केयर सेंटर के सामने इमरजेंसी में 50 बेड से 100 बेड का विस्तार कार्य पूरा हो गया है। यह सुविधा अप्रैल से मिलने लगेगी।
मेरठ में तैयार हो रहा एसजीपीजीआई जैसा ट्रामा सेंटर
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में लखनऊ के एसजीपीजीआई जैसा ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू हो चुका है। यह लेवल-वन ट्रामा सेंटर है। जहां गंभीर घायलों का उपचार किया जाएगा। इस सेंटर में भर्ती होने के बाद मरीज को एम्स के अलावा कहीं और उपचार के लिए रेफर नहीं किया जा सकेगा।
यहां पर न्यूरो सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन के साथ प्लास्टिक सर्जन की सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं मिलेंगी। इमरजेंसी के पीछे चार मंजिला भवन तैयार हो रहा है। इसमें 100 बेड और आधुनिक आपरेशन थियेटर, सभी उपकरणों, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड व ब्लड स्टोरेज यूनिट से युक्त होगा। 2027 में यह सुविधा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रोड एक्सीडेंट के घायलों को मिलने लगेगी।
नए पदों के सृजन से दूर होगी चिकित्सकों की कमी
मेडिकल कालेज प्रशासन के अनुसार 100 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर और 100 बेड का ट्रामा सेंटर बनने के बाद लगभग 256 नए पदों का सृजन होगा। जिसमें 50 विशेषज्ञ डाक्टर होंगे। क्रिटिकल केयर, प्लास्टिक सर्जन, मेडिसिन इमरजेंसी विशेषज्ञ, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञों की कमी दूर होगी। लगभग 200 पदों पर नर्सिंग व पैरा मेडिकल स्टाफ मिलेगा। मरीजों की देखभाल में आ रही कमी इससे दूर होगी। खास बात ये रहेगी कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की 24 घंटे की मौजूदगी सुनिश्चित होगी। जो मरीजों-तीमारदारों की प्रमुख मांगों में है।
मेडिकल कालेज परिसर में बनेगा जच्चा-बच्चा ब्लाक
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में जच्चा-बच्चा ब्लाक अलग से बनेगा। इसके लिए लंबे समय से प्रस्ताव शासन में लंबित थे। अब जाकर इसकी अनुमति मिल गई है। 100 बेड का यह अस्पताल होगा। जिसमें नए आधुनिक सुविधाओं से युक्त लेबर रूम होंगे। नवजात शिशुओं की गहन चिकित्सा इकाई होंगे। इसके खुलने भी स्त्री रोग विशेषज्ञों और बच्चों के डाक्टरों के पद भी सृजित होंगे। आठ से 10 नए विशेषज्ञ डाक्टर बढ़ जाएंगे। इससे गर्भवती और नवजात शिशु से लेकर बड़े बच्चों तक की उपचार सुविधाएं बेहतर हो सकेंगी.
इन सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की है दरकार
- गैस्ट्रोएंटरोलाजी, सर्जिकल आंकोलाजी, रियूमेटोलाजी, जेनेटिक सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की दरकार है। इन सेवाओं के अभाव में पेट, आंत संबंधी गंभीर बीमारियों, कैंसर, लिंगामेंट, हड्डियों व जोड़ के गंभीर समस्याओं का निदान नहीं हो पाता है। मरीजों को दिल्ली रेफर करना पड़ता है।
- मेडिकल कालेज में अभी न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, यूरोलाजी, कार्डियक थोरेसिक और कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, प्लास्टिक सर्जरी की सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं मौजूद हैं। कुल 56 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद हैं। जिसके सापेक्ष 23 भरे हैं। खाली पदों पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों की दरकार है।
- मेडिकल कालेज में जैसे-जैसे नए विभाग, सुविधाएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसेर हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग खोलने की जरूरत भी महसूस हो रही है। ताकि मेडिकल सुविधाओं का प्रबंधन प्रशिक्षित हाथों में आ सके।
- निजी क्षेत्र के अस्पतालों की सेवाओं में वृद्धि के आसार
मेरठ में मैक्स, फोर्टिस और अपोलो जैसे बड़े समूहों जैसे अस्पताल भी 2026 में खुलने की संभावनाएं बढ़ गईं हैं। ये स्थिति नमो भारत मेट्रो, गंगा एक्सप्रेस वे के चलते बन रही है। साथ ही स्थानीय स्तर पर पहले से खुले निजी अस्पताल भी अब खुद को अपडेट कर रहे हैं। हृदय रोग, न्यूरोसर्जरी, और कैंसर जैसे जटिल रोगों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं अब मेरठ में भी उपलब्ध होने लगी हैं।
इन्होंने कहा
क्रिटिकल केयर, ट्रामा सेंटर, न्यू ओपीडी ब्लाक का काम तेजी से चल रहा है। अब स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, जच्चा-बच्चा ब्लाक के लिए कवायद चल रही है। इसके अलावा गैस्ट्रोएंटरोलाजी, सर्जिकल आंकोलाजी, रियूमेटोलाजी, जेनेटिक सुपर स्पेशियलिटी विभाग के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। एक हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की भी जरूरत है। क्रिटिकल केयर यूनिट और विस्तारित इमरजेसी की सेवाएं इसी साल मरीजों को मिलने लगेंगी। मेरठ में एसजीपीजीआई जैसी सुविधाओं की मांग है। इसी कड़ी में पहले चरण में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। इसके बाद विशेषज्ञ व स्टाफ की कमी दूर की जाएगी।
डा. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, एलएलआरएम।
जिले में चार आधुनिक रेफरल सेंटर बनाए जाने हैं। इसके लिए शासन स्तर से निर्देश मिल चुके हैं। जल्द प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सुविधा की दरकार भी है। खासतौर पर हाइवे से जुड़े कस्बो में मरीजों और दुर्घटना के घायलों की संख्या बढ़ रही है। ये सेंटर गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार मुहैया कराने वाले होंगे।
डा. अशोक कटारिया, सीएमओ। |
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