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18 में शादी, 26 में विधवा और 40 की उम्र में बेटे को दिया कंधा, पहली पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस की दर्दभरी दास्तां

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पहली फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली हीरोइन की कहानी



एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा अब आज उस मुकाम पर है, जहां उसे किसी की पहचान की जरूरत नहीं है। हिंदी सिनेमा के कलाकार आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं लेकिन आज हम आपको हिंदी सिनेमा की पहली पढ़ी-लिखी अभिनेत्री और पहली सबसे रईस एक्ट्रेस की दास्तां सुनाएंगे, जिसके जीवन में दुख और दर्द की भरमार रही। कौन है वो एक्ट्रेस, चलिए बताते हैं आपको...
कम उम्र में ही मिला दुर्गा खोटे को दर्द

14 जनवरी 1905 को एक धनी और शिक्षित मराठी परिवार में दुर्गा खोटे (Durga Khote) का जन्म हुआ था। पहले उनका नाम वीटा लाड था। उनका परिवार बेहद अच्छे ख्यालों का था, गुलाम भारत का ये वो दौर था जब महिलाएं और लड़कियां सिर्फ घरों में रहती थीं। कम उम्र में या तो उनकी शादी हो जाती थी, या फिर उन्हें घर की चार दीवारी में ही रखा जाता था।

  

अब क्योंकि दुर्गा खोटे का परिवार समृद्ध और पढ़ा लिखा था तो ऐसे में उन्होंने उस दौर में सेंट जेवियर्स से ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई पूरी होती कि उससे पहले ही महज 18 साल की उम्र में उनकी शादी विश्वनाथ खोटे से करवा दी गई। विश्वनाथ खोटे भी पढ़े-लिखे थे और इंजीनियरिंग की पढ़ाई उन्होंने पूरी की थी। शादी के बाद दुर्गा का परिवार पूरा हो गया। इसके बाद उन्होंने दो बेटों बकुल और हरिन को जन्म दिया। लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था।

  
पति के निधन के बाद झेली आर्थिक तंगी

महज 26 साल की उम्र में उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद दुर्गा को घर में ताने मिलने लगे। पति के निधन के बाद उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घर के खर्चे के लिए भी उन्हें सुनाया जाता था।

  

आखिरकार उन्होंने खुद कमाने का फैसला किया। दुर्गा खोटे पढ़ी लिखी थीं तो उन्होंने घर के आसपास के बच्चों को ट्यूशन देने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे थोड़ा पैसा वो कमाने लगी और गुजारा करने लगीं। इसी बीच उन्हें फिल्म में काम करने का मौका मिला और ये मौका उन्हें उनकी अंग्रेजी बोलने की वजह से ही मिला।

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पढ़ी-लिखीं थीं तो मिला फिल्मों में काम

दुर्गा खोटे की बहन ने उन्हें एक फिल्म के ऑफर के बारे में बताया। ये ऑफर असल में मिला तो दुर्गा की बहन को ही था लेकिन उन्होंने इसे अपनी बहन को करने को कहा। अब दुर्गा की फर्राटेदार अंग्रेजी देख मेकर्स भी खुश हो गए, क्योंकि उस दौर में इतनी अच्छी अंग्रेजी सिर्फ अंग्रेजों को आती थी तो ऐसे में किसी महिला का इतना अच्छा बोलना सबके लिए हैरानी की बात थी।

  

हालांकि जब उन्हें फिल्म में काम मिला तो समाज के ताने उन्हें मिलने लगे। हालांकि उन्होंने तानों की फिक्र ना करते हुए अपने बच्चों के लिए फिल्मों में काम करना जारी रखा।
सिनेमा में हिट होकर दुर्गा खोटे ने बनाई पहचान

शुरूआती दौर में दुर्गा खोटे ने फरेबी जाल और माया मछिंद्रा जैसी फिल्मों में काम किया। इसके बाद वो ऐसी पहली अभिनेत्री हैं जिन्होंने पहली मराठी बोलती हुई फिल्म में भी काम किया था।

  

फिर वो प्रभात फिल्म कंपनी की फिल्म आयोध्या चा राजा में हीरोइन के तौर पर दिखाई दीं। ये भारत की पहली हिंदी और मराठी भाषा में बनी फिल्म थी। इसके बाद वो कई बैक टू बैक फिल्मों में काम करती गईं। मराठी सिनेमा से लेकर हिंदी सिनेमा तक उन्होंने करीब 200 फिल्मों में काम किया। कभी दादी तो कभी मां के किरदार में वो नजर आईं।

  
मुगल-ए-आजम में दिया शानदार किरदार

हिंदी सिनेमा की सबसे आईकोनिक फिल्म मुगल-ए-आजम का भी वो हिस्सा रहीं। इस फिल्म में उन्होंने जोधाबाई का किरदार निभाया था। ये किरदार आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है। पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार जैसे अभिनेताओं के साथ उन्होंने काम किया।

  

फिल्म में उनका एक डायलॉग काफी मशहूर भी हुआ। इसके अलावा उन्होंने राज कपूर के निर्देशन में बनी बॉबी में ऋषि कपूर की दादी की भूमिका निभाई थी। विदाई, अमर ज्योति समेत कई फिल्मों में उन्होंने काम किया। दुर्गा खोटे चौथी भारतीय महिला हैं, जिन्हें दादा साहब फाल्के पुरुस्कार मिला था।

  

दुर्गा खोटे की जिंदगी दुखों की कमी नहीं रही। 40 साल की उम्र में उनके बेटे का निधन हो गया था। पति के जाने के बाद उनके दूसरे बेटे का भी निधन हो गया और इससे वो बुरी तरह टूट गईं। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा से थोड़ी दूरी भी बनाई लेकिन फिर वो सिनेमा में वापस आ गईं। दुर्गा खोटे के भतीजे विजू खोटे और भतीजी विभा खोटे हिंदी सिनेमा के मशहूर एक्टर्स में से एक रहे हैं। उनकी तीन पीढ़ियां सिनेमा में काम करती आई हैं।  

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