पीतमपुरा गांव स्थित गोदाम में आग लगने के बाद जले हुए सामान। जागरण
शमसे आलम, बाहरी दिल्ली। पीतमपुरा गांव स्थित गोदाम परिसर में बने जिस कमरे से आग फैली, उस कमरे में मृतक बृजेश का बड़ा भाई दिनेश भी सो रहा था। दिनेश ने अंदर फंसे अपने भाई बृजेश और सतीश को बचाने की हर संभव कोशिश की। लेकिन चाहकर भी नहीं बचा सके। जब दिनेश की तरफ आग की लपटें आने लगी। तो उन्होंने विरेंद्र और मिथलेश के साथ मिलकर कच्ची दीवार तोड़ दी।
दिनेश, मिथलेश और विरेंद्र बाहर आ गए। फिर अचानक से सिलिंडर फटने की तेज आवाज आई। आग की लपटें ऊपर उठने लगी। तीनों के सामने ही बृजेश और सतीश जिंदा जल गए। पास के ही गोदाम में रहने वाले विनय कुमार ने बताया कि आग तेजी से फैलने के बाद कोई भी कमरे के गेट के तरफ नहीं भाग सके।
ऐसे में सिर्फ तीन ही लोग अपनी जान बचा सकें। इस हादसे में दिनेश, मिथलेश और विरेंद्र भी झुलस गए, जिनका इलाज जारी है। बृजेश ने काफी मेहनत करके एक बड़ा गोदाम खड़ा किया था। इस गोदाम में 10 से अधिक लोग काम करते थे। रात में इस गोदाम में पांच ही लोग रहते थे। बाकी लोग अपने-अपने घर चले जाते थे। विनय और बृजेश की आखिरी मुलाकात सोमवार को दिन में हुई थी।
बृजेश किसी काम से कहीं बाहर जा रहा था। विनय ने बताया कि कुछ ही दूरी पर उनका भी गोदाम है। सिलिंडर फटने की आवाज सुनकर बाहर आए, तो देखा कि पूरे गोदाम में आग लग गई। बाकी लोग चिल्ला रहे थे। कह रहे थे कि दो लोग अंदर फंसे हैं। लेकिन हालात ऐसा नहीं था कि कोई अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाल सके। लोगों ने तुरंत दमकल और पुलिस को जानकारी दी।
हादसे के बाद परिवार में मातम का माहौल
पड़ोसी विनय कुमार ने बताया कि बृजेश और सतीश दोनों ही बिहार के नालंदा जिला के रहने वाले थे। बृजेश ने करीब 10 वर्ष पूर्व गोदाम खोला था। बृजेश के परिवार में उनकी पत्नी, चार वर्षीय बेटा और आठ महीने की एक बेटी है। सभी बिहार स्थित नालंदा में रहते हैं। विनय ने बताया कि इस हादसे की जानकारी उनके परिवार को दे दी गई। सभी बिहार से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
इस हादसे के बाद से गांव से काफी लोगों के फोन आ रहे हैं। परिवार और गांव में मातम का माहौल है। मृतक सतीश भी बिहार के नालंदा के रहने वाले थे। उनकी पत्नी और दो बेटे हैं, यह सभी भी नालंदा में ही रहते हैं। इनकी पत्नी व अन्य लोग भी दिल्ली आ रहे हैं। |
|