search

12 लाख की स्कार्पियो 3.85 लाख में नीलाम! शराब कांड में बिहार के बड़े अफसरों पर FIR

LHC0088 1 hour(s) ago views 383
  

EOU FIR Muzaffarpur: सकरा के तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं एक दारोगा ने कार्रवाई के दायरे में। फाइल फोटो  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर/पटना। Muzaffarpur Scorpio Auction Scam: शराब और गाड़ियों की नीलामी के मामले को लेकर बिहार का मुजफ्फरपुर जिला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला इसलिए अधिक गंभीर माना जा रहा क्योंकि कोर्ट के आदेश के बाद भी गड़बड़ी की गई।  

शराब के साथ जब्त एक स्कार्पियो को कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुक्त नहीं करने और बाद में बेहद कम कीमत पर नीलाम करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, डीएसपी पूर्वी, सकरा के तत्कालीन थानाध्यक्ष और एक दारोगा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है।

ईओयू में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मुशहरी निवासी सुशील कुमार सिंह की स्कार्पियो गाड़ी वर्ष 2020 में सकरा थाना क्षेत्र से शराब के साथ जब्त की गई थी। जब्ती के दौरान वाहन से पांच बोतल विदेशी शराब बरामद होने का दावा किया गया था।

इसके बाद पीड़ित ने विशेष उत्पाद न्यायालय में वाहन मुक्त कराने के लिए याचिका दायर की। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष को वाहन छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन आदेश के बावजूद वाहन नहीं छोड़ा गया।
कोर्ट के आदेश के बाद भी नीलामी

काफी समय बीतने के बाद मार्च 2023 में न्यायालय को जानकारी दी गई कि वाहन को राज्यसात कर नीलाम कर दिया गया है। इसके खिलाफ पीड़ित ने उत्पाद विभाग में अपील और पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, लेकिन दोनों ही खारिज कर दी गईं। इसके बाद पीड़ित ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गंभीर अनियमितता पाते हुए ईओयू को प्राथमिकी दर्ज कर जांच का आदेश दिया।
12 लाख की स्कार्पियो 3.85 लाख में बेच दी गई

हाईकोर्ट की सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि एक्साइज कोर्ट-1 ने 11 जनवरी 2023 को वाहन मुक्त करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद न तो वाहन छोड़ा गया और न ही आदेश का पालन किया गया। इसके उलट, 31 मार्च 2023 को स्कार्पियो की नीलामी कर दी गई।


सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वर्ष 2018 में खरीदी गई यह स्कार्पियो जनवरी 2022 तक बीमित थी और उसकी कीमत करीब 12 लाख 12 हजार रुपये आंकी गई थी, जबकि नीलामी में इसे महज 3.85 लाख रुपये में बेच दिया गया। यानी बीमित मूल्य के करीब 30 प्रतिशत पर वाहन की नीलामी कर दी गई।
डीएसपी पूर्वी द्वारा वाहन के उपयोग पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि दिसंबर 2020 से मार्च 2023 तक उक्त स्कार्पियो का उपयोग तत्कालीन डीएसपी पूर्वी द्वारा किया जाता रहा। इसे भी अदालत ने गंभीर अनियमितता मानते हुए अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़े किए।
490 वाहनों की नीलामी में रैकेट की आशंका

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि इसी तरह 490 वाहनों की नीलामी की गई थी। नीलामी में एक ही व्यक्ति द्वारा आठ वाहन खरीदे जाने और कई लोगों द्वारा 4-5 वाहन खरीदने के तथ्य सामने आए। इसे देखते हुए अदालत ने नीलामी प्रक्रिया में रैकेट की आशंका जताते हुए आर्थिक अपराध इकाई को अलग से विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।

अब चूंकि पूरा मामला ईओयू के पाले में चला गया है तो यह माना जा रहा है कि इसके पीछे का पूरा खेल सबके सामने आएगा। शराब जब्ती के दौरान पकड़ी गई गाड़ियों को नीलाम करने के नाम पर जि नियमों की अनदेखी की गई, उसके असली गुनहगार सामने आ सकेंगे। उनका चेहना बेनकाब हो सकेगा।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
149671

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com