अर्चना पूरन सिंह को हुई दुर्लभ बीमारी CRPS (Picture Credit- Instagram)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में बॉलीवुड और टीवी की दुनिया की जानी-मानी अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह से जुड़ी एक खबर सामने आई है। दरअसल, एक्ट्रेस इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रही हैं। इस बारे में उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने जानकारी दी।
आयुष्मान ने खुलासा किया कि उनकी मां एक बेहद दुर्लभ बीमारी \“कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम\“ (CRPS) से जूझ रही हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज को लगातार और असहनीय दर्द होता है। जानकारी के मुताबिक, अर्चना को यह समस्या हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) के बाद शुरू हुई। इस खुलासे के बाद से ही लोग इस कंडीशन के बारे में लगातार सर्च कर रहे हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे क्या होता है CRPS-
क्या है CRPS?
कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम (CRPS) एक दुर्लभ और बेहद दर्दनाक स्थिति है, जो आमतौर पर शरीर के किसी एक हिस्से-जैसे हाथ, पैर, हथेली या पंजों—को प्रभावित करती है। इसमें मरीज को चोट ठीक हो जाने के बाद भी लंबे समय तक असहनीय दर्द महसूस होता है। यह दर्द शारीरिक चोट की गंभीरता से कहीं ज्यादा होता है और मरीज की मेंटल हेल्थ व रूटीन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
इस बीमारी के दो प्रकार होते हैं-
- टाइप-I (RSD): यह तब होता है, जब कोई बीमारी या चोट लगी हो, लेकिन नसों (Nerves) को सीधा नुकसान न पहुंचा हो। इसे पहले \“रिफ्लेक्स सिम्पैथेटिक डिस्ट्रॉफी\“ कहा जाता था।
- टाइप-II (काउसाल्जिया): यह तब होता है, जब किसी चोट के कारण नसों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा हो।
सीआरपीएस के प्रमुख लक्षण
CRPS के लक्षण आमतौर पर चोट लगने या सर्जरी के 4 से 6 हफ्ते बाद दिखने शुरू होते हैं, ये लक्षण निम्न तरह के हो सकते हैं:
- प्रभावित हिस्से में लगातार जलन, चुभन या असहनीय अंदरूनी दर्द होना।
- स्किन को हल्का-सा छूने या हवा लगने पर भी तेज दर्द महसूस होना।
- प्रभावित हिस्से का रंग लाल, नीला या पीला पड़ जाना।
- त्वचा का तापमान बदलना (कभी बहुत गर्म, कभी ठंडा)।
- प्रभावित अंग में सूजन रहना और उसे हिलाने-डुलाने में परेशानी होना।
- त्वचा का पतला या चमकदार दिखना।
- नाखून या बालों की ग्रोथ में असामान्य बदलाव होना।
क्यों और किसे होती है यह बीमारी?
यह बीमारी क्यों होती है, इसका सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स ऐसा मानते हैं कि सेंट्रल और पेरिफेरल नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी या सूजन (Inflammation) के कारण यह बीमारी होती है।
90% मामलों में यह बीमारी किसी चोट के बाद होती है। जैसे- हड्डी टूटना, सर्जरी, मोच, जलना या कटना। कभी-कभी बहुत टाइट प्लास्टर चढ़ने से भी नसों पर दबाव पड़ता है, जो इसका कारण बन सकता है।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा
यह बीमारी बच्चों के मुकाबले वयस्कों (खासकर 40 की उम्र के बाद) को अपना शिकार ज्यादा बनाती है। वहीं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है।
रिस्क फैक्टर्स
- डायबिटीज या स्मोक के कारण नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे चोट के बाद उनकी रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
- अस्थमा या अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
- कुछ मामलों में यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है।
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