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Agra Fort का रहस्य: मजमूद गजनवी के मकबरे का दरवाजा, जिसे अंग्रेजों ने सोमनाथ मंदिर का बताया

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Agra Fort में रखा महमूद गजनवी के मकबरे का दरवाजा, जिसे सोमना मंदिर का दरवाजा बताकर झूंठ प्रचारित किया गया था। जागरण



जागरण संवाददाता, आगरा। Agra Fort: सोमनाथ मंदिर भारतीय संस्कृति और भारतीयों के स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के एक हजार वर्ष पूरा होने पर आठ से 11 जनवरी तक \“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व\“ मनाया गया। सोमनाथ मंदिर पर वर्ष 1025 ईस्वी में हमला करने वाले महमूद गजनवी से आगरा किला का इतिहास भी जुड़ा हुआ है। आगरा किला में महमूद गजनवी के मकबरे का दरवाजा रखा हुआ है।
अफगानिस्तान से विजय प्रतीक के रूप में 1842 में उखाड़ लाई थी बंगाल नेटिव आर्मी

प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध, 1842 में विजयी रही बंगाल नेटिव आर्मी अफगानिस्तान के गजनी स्थित गजनवी के मकबरे से इस दरवाजे को उखाड़ लाई थी। भारतीय लोगों की सहानुभूति पाने को अंग्रेजों ने इस दरवाजे को महमूद गजनवी द्वारा लूटा गया सोमनाथ मंदिर का दरवाजा बताकर झूठ बोला था।

छह दशक से अधिक समय तक इससे भारतीय जनसाधारण के विश्वास को ठगा गया। बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक सर जान मार्शल ने दरवाजे का सच उजागर किया था।
आगरा किला में रखे दरवाजे को अंग्रेजों ने बताया था सोमनाथ मंदिर का दरवाजा

आगरा किला में दीवान-ए-खास के पास एक कक्ष में विशाल दरवाजा रखा है। इसके बाहर लगाए गए शिला पट्ट के अनुसार यह दरवाजा गजनी स्थित महमूद गजनवी के मकबरे पर लगा था। प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध, 1842 में जीत के बाद बंगाल नेटिव आर्मी की 1-जाट बटालियन यह दरवाजा उखाड़कर ले आई थी।

गर्वनर जनरल लार्ड एलनबरो ने झूठी घोषणा की थी कि यह चंदन का वही दरवाजा है, जिसे 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी लूटकर ले गया था। एलनबरो ने इसे 800 वर्ष पुराने अपमान का बदला कहकर प्रचारित किया।
रास्ते में पड़े गांवों में इसका स्वागत किया गया

सोमनाथ मंदिर का दरवाजा बताए जाने की वजह से रास्ते में पड़े गांवों में इसका स्वागत किया गया। आगरा में पड़ाव के दौरान यह दरवाजा आगरा किला में रखा गया था। अन्य सामान तो यहां से चला गया, लेकिन यह दरवाजा यहीं रहा। करीब छह दशक तक यह झूठ प्रचारित किया जाता रहा। एएसआई के वर्ष 1902-28 तक महानिदेशक रहे सर जान मार्शल ने इसे सोमनाथ मंदिर का दरवाजा मानने से इनकार करते हुए गजनवी के मकबरे का दरवाजा बताया था।
देवदार की लकड़ी से किया गया दरवाजे का निर्माण

इस दरवाजे का निर्माण गजनी में मिलने वाली स्थानीय देवदार की लकड़ी से किया गया है। प्राचीन गुजराती काष्ठकला से इसका अलंकरण भी अलग है। दरवाजे के ऊपरी भाग में अरबी भाषा में महमूद गजनवी की पदवियों का उल्लेख है। आजाद भारत में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार होने पर इसे वहां लगवाने पर विचार किया गया था, मगर इसका सच सामने आने पर यह विचार त्याग दिया गया था।
16.5 फीट ऊंचा है दरवाजा

गजनी दरवाजा 16.5 फीट ऊंचा और 13.5 फीट चौड़ा है। करीब आधा टन वजनी दरवाजे में कीलों का प्रयोग नहीं किया गया है। यह ज्यामितीय तारारूपक, षटकोणीय और अष्टकोणीय फलकों को फ्रेम में एक-दूसरे से जोड़कर बनाया गया है। जिस कक्ष में यह दरवाजा रखा हुआ है, उसके बाहर हिंदी व अंग्रेजी में लगे शिला पट्ट में इसे गजनी दरवाजा बताया गया है। हालांकि, इसके पास छोटा सा शिला पट्ट भी है, जिस पर सोमनाथ दरवाजा लिखा हुआ है।
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